साइबर सिटी में फर्जी काल सेंटर का भंडाफोड़, संचालक सहित 38 लोग गिरफ्तार

 


उद्योग विहार फेज-एक इलाके में की गई छापेमारी।

सेंटर से प्रतिदिन 600 से 700 लोगों को फोन किए जाते थे।इनमें से काफी लोग फंस जाते थे। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने लोगों से वसूली की जा चुकी है। अंदाजा है कि 60 से 70 लाख रुपये की वसूली प्रति माह की जाती थी।

गुरुग्राम, संवाददाता। साइबर क्राइम थाने की टीम ने शुक्रवार रात उद्योग विहार फेज-एक में संचालित फर्जी काल सेंटर का भंडाफोड़ किया। मौके से कुल 38 लोगों को काबू किया गया। इनमें दो संचालक और दो टीम लीडर भी शामिल हैं। आरोपितों के कब्जे से एक लाख, 70 हजार रुपये, 27 लैपटाप और 44 मोबाइल बरामद किए गए। सभी को शनिवार दोपहर अदालत में पेश किया गया। संचालक और टीम लीडर को पूछताछ के लिए पांच-पांच दिन की रिमांड पर लिया गया है। अन्य को न्यायिक हिरासत में भोंडसी जेल भेज दिया गया। सभी लोन की रिकवरी करने के नाम पर ब्लैकमेल कर वसूली करते थे।

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लोन के नाम पर वसूली

शुक्रवार शाम साइबर क्राइम थाने को सूचना मिली कि उद्योग विहार फेज-एक में प्लाट नंबर-26 के प्रथम तल पर फर्जी काल सेंटर चलाया जा रहा है। इसके बाद इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर ओमप्रकाश और इंस्पेक्टर सुमेर सिंह के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। सूचना मिलते ही सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर क्राइम) इंदीवर भी पहुंच गए। जैसी सूचना थी, वैसी ही गतिविधियां चल रही थीं। फिर काम कर रहे सभी कर्मचारियों के लैपटाप और मोबाइल की जांच की गई। छानबीन से यह भी सामने आया है कि लोग जब लोन भर देते थे, उसके बाद भी इसी तरह दबाव बनाकर वसूली की जाती थी।

नौ महिलाएं भी हुईं गिरफ्तार

लोन भरने की तय तारीख से पहले ही ग्राहकों पर दबाव बनाना शुरु कर देते थे। पूरी छानबीन करने के बाद सेंटर के संचालक झज्जर जिले के गांव खेड़ी होजदारपुर निवासी अभिनव, दिल्ली के रोहिणी कला निवासी शांतनु, टीम लीडर दिल्ली के कापसहेड़ा निवासी संदीप सिंह और छाबला निवासी हिमांशु सहित 38 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें नौ महिलाएं शामिल हैं।

पांच महीने से चलाया जा रहा था सेंटर

सेंटर पिछले पांच महीने से चलाया जा रहा था। प्रतिदिन 600 से 700 लोगों को फोन किए जाते थे। इनमें से काफी लोग फंस जाते थे। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने लोगों से वसूली की जा चुकी है। अंदाजा है कि 60 से 70 लाख रुपये की वसूली प्रति माह की जाती थी। सहायक पुलिस आयुक्त (क्राइम) प्रीतपाल ने बताया कि आनलाइन चाइनीज और अन्य एप्स (टीएक्स, करता लोन, स्पीड लोन, सुपर वालेट) आदि से लोन लेने वालों की जानकारी दिल्ली निवासी मनीष और हरियाणा के भिवानी निवासी प्रदीप काल सेंटर को उपलब्ध कराते थे। सेंटर को कुल वसूली का 25 प्रतिशत दिया जाता था। बाकी दोनों ले जाते थे।

ब्लैकमेल करने पर मिलते थे ज्यादा पैसे 

उदाहरणस्वरूप दो हजार रुपये लोन लेने वालों से ब्याज सहित काफी अधिक पैसे जमा करने के लिए कहा जाता था। मना करने पर किसी न्यूड फोटो के साथ लोन लेने वाले की भी न्यूड फोटो लगाकर भेज दिया जाता था। रिश्तेदारों और जानकारों को भी भेजने की धमकी दी जाती थी। इससे लोग दो हजार की बजाय 10 से 20 हजार रुपये तक देने को मजबूर होते थे। यही नहीं पैसे देने के बाद भी ब्लैकमेल किया जाता था। फोन करने वाले कर्मचारियों को प्रति ग्राहक के हिसाब से वसूली का 20 प्रतिशत दिया जाता था। छानबीन से साफ होगा कि कितने लोगों को शिकार बनाया गया और कुल कितने रुपयों की ठगी की गई। बता दें कि पिछले कुछ सालों के दौरान शहर में 30 से अधिक फर्जी काल सेंटर पकड़े जा चुके हैं।