दिल्ली विधानसभा में गांवों के विकास का उठा सवाल, दो साल में नहीं हुआ कोई टेंडर, फिर भी 50 करोड़ खर्च का दावा

 

गांव के विकास के लिए पिछले दो साल में एक भी टेंडर नही हुआ।

राजधानी दिल्ली में गांव के विकास को रफ्तार नहीं मिल रही है। यहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। पिछले दो साल से गांव में विकास कार्य कराने के लिए एक भी टेंडर प्रक्रिया नहीं हो सकी है। हालांकि सत्ताधारी नेता विकास का दावा कर रहे हैं।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। राजधानी दिल्ली में गांवों का विकास रफ्तार नहीं पकड़ रहा है। गांवों में होने वाले विकास कार्यो को लेकर सत्ताधारी व विपक्ष आमने-सामने हैं। गांवों के विकास के मुद्दे पर दिल्ली विधानसभा सदन में हंगामा। विकास मंत्री गोपाल राय के जवाब से संतुष्ट नही हुए, नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास के लिए पिछले दो साल में एक भी टेंडर नही हुआ।

जिस पर मंत्री ने बताया कि 2021 में गांवों के विकास पर 50 करोड़ खर्च हुए और 2022 में अब तक 37 करोड़ खर्च हुए हैं। यह कार्य टेंडर के आधार पर ही पूरे गए हैं। इस दौरान सत्ता पक्ष के कुछ विधायक भी विपक्ष के खिलाफ बोलने लगे जिस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मंत्री जी जवाब दें, विधायकों से जवाब नही दें। हंगामा बढ़ने लगा तो विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों को शांत कराया। 

वहीं, सदन के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने जानकारी दी है कि 26 मार्च को बजट पेश किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा के सदस्यों से अनुरोध किया कि सभी समय पर सदन में पहुंचें। सदन में सभी सदस्यों के समय पर नही पहुंचने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की।