यूक्रेन से लौटे छात्रों ने बयां की अपनी परेशानी, कहा- 72 घंटे माइनस 10 डिग्री में किया इंतजार, लगा बम से नहीं तो ठंड से मर जाएंगे

 

यूक्रेन से लौटे छात्रों ने बयां की अपनी परेशानी

सूमी में फंसे छात्रों ने इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा कि वे अब जोखिम लेकर बाहर निकलने को मजबूर हो रहे हैं क्योंकि उनके पास खाने-पीने का सामान खत्म हो रहा है और उनकी सुनवाई भी नहीं हो रही है।

ग्वालिय । रूस और यूक्रेन के बीच 11वें दिन के बाद भी युद्ध जारी है। दोनों देशों के बीच स्थिति लगातार बिगड़ती ही जा रही है। यूक्रेन से लौटे छात्र अपनी हालत बयां कर रहे हैं। यूक्रेन से लौटे ग्वालियर के छात्र प्रतीक चौधरी ने कहा कि रोमानिया बार्डर पर हजारों की संख्या में छात्र मौजूद थे। बार्डर के गेट नहीं खुलने के कारण हम 72 घंटे तक रोमानिया बार्डर पर माइनस 10 डिग्री तक तापमान में लाइन में खड़े रहे। उस समय लग रहा था कि हम बम या मिसाइल नहीं, लेकिन ठंड से जरूर मर जाएंगे। बार्डर पर कई छात्र हाइपोथर्मिया के कारण बेहोश हो रहे थे।शनिवार को यूक्रेन से लौटे ग्वालियर के छात्र प्रतीक के अलावा शहर के तीन अन्य छात्र भी लौटकर आए हैं। इनमें काकुल जाट, रवि कुमार और रोहन गुप्ता शामिल हैं। प्रतीक को रोमानिया से केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्राथमिकता से फ्लाइट में बैठाया था। इसके बाद दिल्ली पहुंचने पर वे महाकौशल एक्सप्रेस से शाम को ग्वालियर पहुंचे। इसी प्रकार काकुल जाट को उनके पिता भीमसेन वर्मा और रवि कुमार को उनके स्वजन सड़क मार्ग से दिल्ली से लेकर ग्वालियर पहुंचे। घर पहुंचने पर स्वजनों ने माला पहनाकर अपने चहेतों का स्वागत किया। इस दौरान भावुकता से स्वजनों की आंखें भी नम हो गईं।

यूक्रेन से लौटे छात्र रवि कुमार ने बताया कि वह और अन्य 14 छात्र डेनिप्रो शहर से टैक्सी कर रोमानिया बार्डर पहुंचे। वहां 12 घंटे तक लाइन में इंतजार करना पड़ा, क्योंकि छात्रों की भारी भीड़ वहां जमा थी। इसके बाद तीन दिन तक रोमानिया में ही भारत वापसी के लिए अपनी बारी का इंतजार किया, क्योंकि पहले बीमार लोगों को देश वापस भेजने के लिए प्राथमिकता दी जा रही थी।

भितरवार निवासी काकुल जाट यूक्रेन के खारकीव शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थीं। खारकीव पर चूंकि रूसी सेना लगातार हमले कर रही थी, इस कारण वहां जान का खतरा बना हुआ था। जैसे-तैसे टैक्सी कर काकुल पोलैंड बार्डर पहुंचीं और वहां से बार्डर पार कर भारतीय विमानों से दिल्ली आईं। काकुल ने बताया कि यूक्रेन में स्थिति बहुत बुरी है और खारकीव में लगातार धमाके हो रहे थे। रूसी सेना लगातार इस शहर को टारगेट कर रही थी।

यूक्रेन के सूमी शहर में फंसे ग्वालियर के पीयूष सक्सेना और अलीशा खान सहित अन्य भारतीय छात्रों को वहां से निकालने को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया है। शनिवार को सूमी में फंसे छात्रों ने इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि वे अब जोखिम लेकर बाहर निकलने को मजबूर हो रहे हैं, क्योंकि उनके पास खाने-पीने का सामान खत्म हो रहा है और उनकी सुनवाई भी नहीं हो रही ह

ै।