यूक्रेन पर हमले को लेकर जी-7 देशों ने पुतिन को घेरा, कहा- युद्ध के लिए जवाबदेह ठहराने के लिए नहीं छोड़ेंगे कोई कसर

 

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की फाइल फोटो

Russia Ukraine Crisis बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में जी-7 देशों की बैठक के बाद संयुक्त बयान में रूस पर पहले से ही लगाए गए आर्थिक और वित्तीय उपायों को पूरी तरह से लागू करने सहित गंभीर परिणामों को लागू करने का भी संकल्प लिया गया है।

ब्रसेल्स, एएनआइ। रूस द्वारा यूक्रेन पर जारी आक्रमण को लेकर अमेरिका समेत कई देश पुतिन को घेरने में लगे हुए हैं। बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में शुक्रवार को जी-7 देशों की अहम बैठक हुई। जी-7 देशों के नेताओं ने कहा कि वे बेलारूस में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और लुकाशेंको शासन को यूक्रेन में उनकी आक्रामकता के लिए जिम्मेदार ठहराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। साथ ही जी-7 नेताओं ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि इसके लिए हम अपने सहयोगियों और भागीदारों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। यह संयुक्त बयान ब्रसेल्स में जी-7 नेताओं की बैठक के बाद आया है, जो ऐसे समय में आया है जब रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में आम नागरिकों की मौत तेजी से बढ़ रही है।

रूसी आक्रमण को अनुचित, अकारण और अवैध बताते हुए जी-7 नेताओं ने कहा कि रूसी नेतृत्व 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन के क्षेत्र में शुरू हुए सैन्य अभियानों को निलंबित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के आदेश का तुरंत पालन करने के लिए बाध्य है।

जी-7 देशों ने रूस पर गंभीर परिणामों को लागू करने का लिया संकल्प

संयुक्त बयान में रूस पर पहले से ही लगाए गए आर्थिक और वित्तीय उपायों को पूरी तरह से लागू करने सहित गंभीर परिणामों को लागू करने का भी संकल्प लिया गया है। इस बयान में रूसी लोगों को यह कहते हुए संबोधित किया गया कि रूस के लोगों को पता होना चाहिए कि हमें उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं है। यह बेलारूस में लुकाशेंको शासन सहित राष्ट्रपति पुतिन, उनकी सरकार और समर्थक हैं, जो इस युद्ध और इसके परिणामों को रूसियों पर थोप रहे हैं और यह उनका निर्णय है जो रूसी लोगों के इतिहास को बदनाम करता है।

बयान में आगे कहा गया है कि परमाणु स्थलों के पास रूसी हमलों ने यूक्रेनी आबादी को अत्यधिक जोखिम में डाल दिया है, जिसमें विनाशकारी परिणाम की संभावना है।

बता दें कि जी-7 सात देशों का एक समूह है। इस समूह में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिकी देशों का  एक अंतर-सरकारी राजनीतिक मंच है।