7 अरब डालर से अधिक विदेशी ऋण बकाया और महंगाई चरम पर, जानें श्रीलंका की आर्थिक बर्बादी के क्‍या रहे कारण?

 

जानें श्रीलंका की आर्थिक बर्बादी के कारण

श्रीलंका के आर्थिक हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि वहां के लोगों को खाने तक की किल्लत हो गई है। इसके अलावा ईंधन बिजली व अन्य सुविधाओं से भी लोग वंचित हैं। देश पर विदेशी कर्ज काफी अधिक हो गया है ।

कोलंबो, रायटर्स।  श्रीलंका की आर्थिक व्यवस्था के खराब हालात की शुरुआत 2019 में हुए आतंकी हमले के साथ ही हो गई थी और अब यह अधिक बदतर हो चुकी है। देश की आमदनी के अहम जरियों में से एक पर्यटन व्यवस्था  है  जिसपर आतंकी हमले व कोरोना महामारी ने अपना असर दिखाया। इसके अलावा आर्गेनिक खेती, टैक्स कटौती के साथ  काफी अधिक विदेशी कर्ज होने से यह दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया है।

इसी साल चुकानी है 7 अरब डालर से अधिक विदेशी कर्ज

देशभर में आर्थिक हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोग भूखे रहने को मजबूर हो गए हैं। बता दें कि 2022 में श्रीलंका को 7 अरब डालर से अधिक विदेशी ऋण चुकाना है। श्रीलंका को बड़े कर्जे चुकाने के लिए छोटे-छोटे कर्ज लेने पड़ रहे हैं। इसके कारण अब श्रीलंका ने कई देशों को अपने परियोजनाओं को लीज पर देने का विचार किया है।

2019 के आतंकी हमले से प्रभावित हुआ था पर्यटन

श्रीलंका की अर्थव्यवस्था की बर्बादी की शुरुआत 2019 में ही हो गई थी जब यहां आतंकी हमला हुआ था। इसके बाद ही यहां की पर्यटन व्यवस्था प्रभावित हो गई थी जो देश में विदेशी मुद्रा की कमाई के बड़े साधनों में से एक है। बता दें कि अप्रैल में आतंकवादियों ने ईस्टर के मौके पर तीन चर्च पर हमला किया जिसमें 269 लोगों की मौत हो गई थी।

टैक्स की कटौती

तत्कालीन राष्ट्रपति राजपक्षे ने देश की जनता पर केंद्रित एक नई नीति , टैक्स कटौती व रहन सहन पर होने वाले खर्च को भी कम करने का वादा किया। इस संदर्भ में 2019 में वैल्यू ऐडेड टैक्स व इनकम टैक्स की भी कटौती हुई। इस कटौती को लोगों ने सही नहीं माना जबकि यह रोजगार के साथ विकास को बढ़ाने के मकसद से किया गया था लेकिन इसका बुरा असर सरकारी रेवेन्यू पर हुआ। IMF के अनुसार 2 फीसद जीडीपी के साथ टैक्स का नुकसान हुआ

2021 में अचानक शुरू कर दी गई आर्गेनिक खेती

श्रीलंकाई सरकार ने 2021 में रासायनिक उर्वरकों पर रोक लगाने के साथ आर्गेनिक खेती को शुरू करने का निर्देश जारी कर दिया। इसके पीछे राष्ट्रपति राजपक्षे ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था। हालांकि किसान इस अचानक हुए बदलाव के लिए तैयार नहीं थे। बाद में नवंबर में इसमें आंशिक छूट दी गई थी। लेकिन किसानों को यह बदलाव रास नहीं आया क्योंकि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल के साथ खेती में जो कमाई होती थी वह कम हो गई थी। इसका सीधा असर देश के इकोनामी आउटपुट पर हुआ। IMF ने इस बदलाव को श्रीलंका के खराब आर्थिक हालात की वजहों में से एक माना है।

कोरोना महामारी

दुनिया के अन्य देशों की तरह ही श्रीलंका के आर्थिक हालात महामारी कोविड के कारण काफी प्रभावित हुआ है। महामारी ने श्रीलंका की पर्यटन और प्रेषण (रेमिटेंस) से होने वाली कमाई को प्रभावित किया है। इनमें कोरोना प्रभावितों के लिए कैश ट्रांसफर, दवाओं व पीपीई उपकरणों के आयात पर टैक्स की छूट आदि भी यहां के वित्तीय हालात को खराब करने में शामिल हैं।

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चीन की भूमिका है अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि आज श्रीलंका के बदतर आर्थिक हालात में चीन की भूमिका अहम है। हंबनटोटा से प्रस्तावित कोलंबो पोर्ट सिटी तक चीन की मौजूदगी बरकरार है। श्रीलंका के कुल विदेशी कर्ज का करीब 10 फीसद हिस्सा चीन ने रियायती ऋण के नाम पर दे रखा है। इसके अतिरिक्त चीन के सरकारी बैंकों ने कमर्शियल लोन भी दिए हैं। दरअसल वित्तीय संकट के कारण श्रीलंका ने हंबनटोटा पोर्ट का नियंत्रण 99 साल के लिए चीन को दे दिया।

श्रीलंका की सरकार ने पिछले साल अगस्त में राष्ट्रीय आर्थिक आपातकाल की घोषणा की थी और तभी दुनिया भर को यहां के वित्तीय संकट का पता चला। श्रीलंका का विदेशी कर्ज 2014 में जीडीपी के 30 प्रतिशत से लगातार बढ़ रहा है। 2019 में यह जीडीपी का 41.3 प्रतिशत पहुंच गय

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