ड्रोन कमर्शियल पायलट: युवाओं के करियर को परवान चढ़ाएगी नई उड़ान

 

प्रशिक्षित पेशेवर युवाओं की आवश्यकता दिनों दिन बढ़ रही है।

सरकार के प्रोत्साहन से देश में विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा। ऐसे में ड्रोन का संचालन करने वाले कामर्शियल ड्रोन पायलट की मांग भी बढ़ रही है। यदि आपकी भी रुचि इस क्षेत्र में है तो जानें कैसे इसमें खुद को आगे बढ़ा सकते हैं...

नई दिल्‍ली। तमाम क्षेत्रों में आज ड्रोन (अनमैन्ड एयरव्हीकल-यूएवी) की उपयोगिता एवं बढ़ती भूमिका से हम सभी परिचित हैं। कुछ वर्ष पहले रक्षा सेवा या सर्वे के काम में ही ड्रोन का अधिक उपयोग होता था। लेकिन अब व्यावसायिक गतिविधियों में भी इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। देश में इस समय करीब डेढ़-दो सौ स्टार्टअप ड्रोन का निर्माण कर रहे हैं। ड्रोन पायलट निजी क्षेत्र की कंपनियों, सरकारी एजेंसियों, मिलिट्री ग्रुप्स को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। टीम लीज डिजिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले पांच से सात वर्षों में ड्रोन इंडस्ट्री में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से करीब एक लाख नई नौकरियों क्रिएट होने की संभावना है।

विभिन्‍न रूपों में उपयोग: हम सभी देख रहे हैं कि कैसे आज ड्रोन का सफल प्रयोग कृषि कार्यों, फूड डिलीवरी, वैक्सीन पहुंचाने, जमीन का सर्वे करने से लेकर आपदा प्रबंधन में किया जा रहा है। कोरोना काल में तो ड्रोंस ने बुजुर्गों एवं क्वारंटाइन किए गए लोगों तक दवाइयों की इमरजेंसी डिलीवरी की और लोगों के मूवमेंट पर निगरानी तक रखी। इसके अलावा, एरियल फोटोग्राफी, वीडियो ब्लागिंग, फिल्ममेकिंग, जियो सेंसिंग, एनर्जी एवं टेलीकम्युनिकेशंस में भी ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। ड्रोन की इस बढ़ती हुई भूमिका को देखते हुए ही नई ड्रोन नीति (2021) में देसी ड्रोन निर्माताओं को कई तरह की सुविधा-राहत दी गई है। उन्हें अब रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस के लिए सुरक्षा मंजूरी और ड्रोन के रखरखाव के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा, माइक्रो एवं नैनो ड्रोन के लिए रिमोट पायलट लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। डीजीसीए ड्रोन ट्रेनिंग स्कूलों की निगरानी करेगा और आनलाइन पायलट लाइसेंस प्रदान करेगा। अधिकृत ड्रोन स्कूल से रिमोट पायलट सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाले पायलट को 15 दिनों के अंदर डीजीसीए द्वारा रिमोट पायलट लाइसेंस जारी किया जाएगा। ड्रोन को उड़ाने के लिए पीला, हरा और लाल जोन भी निर्धारित किया गया है।

jagran

क्या करते हैं ड्रोन पायलट?

ड्रोन पांच प्रकार के होते हैं : नैनो, माइक्रो, स्माल, मीडियम एवं लार्ज। गैर-व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले नैनो ड्रोंस एवं माइक्रो ड्रोंस को आपरेट करने के लिए किसी प्रकार के पायलट लाइसेंस की दरकार नहीं होती है, जबकि बड़े एवं कामर्शियल (150 किलोग्राम के ऊपर) ड्रोंस को आपरेट करने के लिए ड्रोन पायलट का लाइसेंस लेना होता है। ड्रोन पायलट का कार्य डाटा कलेक्शन करना, एरियल तस्वीरें लेना और फिल्म बनाने की जिम्मेदारी संभालना है। ये फ्लाइट पाथ तैयार करते हैं, फ्लाइट को मानिटर, ड्रोन का सुरक्षित आपरेशन एवं लैंडिंग कराते हैं। ड्रोन में लगे कैमरे एवं अन्य इक्विपमेंट्स को भी यही आपरेट करते हैं। क्लाइंट्स के साथ मीटिंग और उनसे डाटा शेयर क­रते हैं। समय-समय पर नियमों का आकलन करना और उसके अनुसार स्थानीय फ्लाइट ला को मानना भी इनकी जवाबदेही होती है। ये रियल एस्टेट, मार्केटिंग, सर्वेइंग, बिल्डिंग एवं कंस्ट्रक्शन, एंटरटेनमेंट, इंश्योरेंस, सेफ्टी एवं खनन के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इस फील्ड में पार्टटाइम और फुलटाइम दोनों प्रकार से कार्य करने का विकल्प होता है।

कमर्शियल पायलट बनने की पात्रता : पेशेवर ड्रोन पायलट बनने के लिए नागरिक उड्डयन निदेशालय (डीजीसीए) द्वारा मान्यताप्राप्त फ्लाइंग प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) से ट्रेनिंग लेनी होती है। अभ्यर्थी के पास उचित प्रमाण पत्र एवं दस्तावेज होने चाहिए। उन्हें रिमोट पायलट के लिए लाइसेंस लेना होगा, जिसके बाद डीजीसीए पायलट को एक आइडेंटिफिकेशन नंबर देता है और ड्रोन को रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट नंबर। इसके साथ ही उन्हें अनमैन्ड एयरक्राफ्ट आपरेटर परमिट (यूएओपी) भी लेनी होती है, जिसकी वैधता पांच वर्ष होती है। जहां तक शैक्षिक योग्यता की बात है, तो इसके लिए अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष एवं कम से कम दसवीं कक्षा पास होना होगा, वह भी अंग्रेजी माध्यम से। उसके बाद ही वे किसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट को ज्वाइन कर सकते हैं। आमतौर पर यह प्रशिक्षण पांच से सात दिनों (35 घंटे की ट्रेनिंग) का होता है। जानकारों की मानें, तो फिलहाल, किसी तकनीकी संस्थान में ड्रोन से संबंधित कोई स्पेशलाइज्ड कोर्स नहीं हैं। आइआइटी गुवाहाटी में जरूर सेंटर फार एक्सीलेंस इन रिसर्च आन ड्रोन/यूएवी टेक्नोलाजी एंड आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सेंटर शुरू किया गया है, जहां ड्रोन से संबंधित कोर्स आफर किए जा रहे हैं।

jagran

प्रशिक्षित युवाओं की बढ़ रही मांग : हवाईअड्डा एरियल इनोवेशंस के निदेशक एवं सह-संस्थापक गीतेश कुमार ने बताया कि अपने स्टार्टअप के माध्यम से हम ड्रोन निर्माण के अलावा युवा पीढ़ी को यूएवी डेवलपमेंट एवं प्रोग्रामिंग में प्रशिक्षण देते हैं। उनके लिए चार सप्ताह का बाकायदा कोर्स है। इसमें उन्हें ड्रोन कंपोनेंट्स, पार्ट्स, इंजीनियरिंग कांसेप्ट्स आदि के बारे में बताया जाता है। साथ ही, यह भी बताया जाता है कि ड्रोन का निर्माण कैसे होता है और उसे फ्लाइट के लिए कैसे तैयार किया जाता है। इसके लिए स्टूडेंट्स के पास मैथ्स की अच्छी नालेज होनी चाहिए। उन्हें मैटलैब, पाइथन एवं सी, सी++ जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज भी आनी चाहिए।

हम सैन्यकर्मियों को ड्रोन जैमर तकनीक का भी प्रशिक्षण देते हैं। समय-समय पर वर्कशाप भी आयोजित की जाती है। ‘इंडियन फ्लाइंग कम्युनिटी’ नाम से एक कम्युनिटी है, जिसमें देश भर से युवा एवं ड्रोन टेक्नोलाजी के विशेषज्ञ जुड़े हैं। हमारी टीम लगातार रिसर्च एवं इनोवेशन कर ड्रोंस विकसित कर रही है। मेरा मानना है कि आने वाला भविष्य इसी का है।