घर पर बैठा रहा बीमार दिव्यांग बुजुर्ग, बन गया नकली फर्म पार्टनर, पढ़िए बीमार दिव्यांग वृद्ध के नाम पर ठगों का खेल

 

ठगों ने ओवरड्राफ्ट के बदले गिरवी रखी पीड़ित की बेची गई संपत्ति

यह भी पता चला है कि ओवरड्राफ्ट के बदले पीड़ित की बेटी मेघना मोहन की द्वारका स्थित एक संपत्ति गिरवी रखी गई थी। लेकिन यह संपत्ति पीड़ित और उनकी बेटी द्वारा वर्ष 2018 में ही बेच दी गई थी। इसके सुबूत पीड़ित के पास मौजूद हैं।

नई दिल्ली  । कालकाजी थाना क्षेत्र में ठगों ने एक दिव्यांग 71 वर्षीय वृद्ध को अपना निशाना बना लिया। आरोपितों ने वृद्ध के नाम पर कालकाजी स्थित पंजाब नेशनल बैंक में एक करोड़ 30 लाख का ओवरड्राफ्ट बनवा लिया और पीड़ित को भनक तक नहीं लगने दी। ओवरड्राफ्ट के बदले जो संपत्ति गिरवी रखी गई थी, वह पीड़ित की बेटी के नाम पर थी। उसे पीड़ित ने वर्ष 2018 में ही बेच दिया था।

बृहस्पतिवार को पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में पुलिस बैंक की भूमिका की भी जांच कर रही है। पीड़ित बुजुर्ग का आरोप है कि बिना सत्यापन के बैंक अधिकारियों ने इतनी बड़ी रकम का ओवरड्राफ्ट कैसे कर दिया। इसलिए इसमें बैंक अधिकारियों की मिलीभीगत की भी आशंका है।पुलिस के अनुसार, सुरेंद्र मोहन (71) कालकाजी स्थित कोणार्क अपार्टमेंट में रहते हैं। वह दिव्यांग हैं तथा हृदय की बीमारी सहित वृद्धावस्था से संबंधित अन्य कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। 15 जनवरी को कालकाजी स्थित पंजाब नेशनल बैंक द्वारा उन्हें एक पत्र भेजकर एक लोन खाते के संबंध में सूचना दी गई। इसमें कहा गया है कि सुरेंद्र ने हरप्रीत इंपेक्स के नाम पर एक करोड़ 30 लाख का ओवरड्राफ्ट बनवा रखा था।

यह पत्र देख वृद्ध के पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि पत्र में पीड़ित सुरेंद्र को पार्टनरशिप फर्म हरप्रीत इंपेक्स में पार्टनर के रूप में पेश किया गया था। लेकिन पीड़ित इससे पहले न तो कभी उपरोक्त बैंक में गए थे और न ही उस बैंक में उनका कोई खाता था। इसके बाद पीड़ित सुरेंद्र अपनी पत्नी के साथ कालकाजी स्थित बैंक पहुंचे और सारी बात बताई।

बैंक द्वारा लोन के लिए जमा किए गए कागजात की जांच की गई तो पता चला कि वे सारे कागजात नकली थे और उन पर लगी फोटो किसी अंजान व्यक्ति की थी जिसे सुरेंद्र मोहन के रूप में पेश किया गया था। यह भी पता चला है कि ओवरड्राफ्ट के बदले पीड़ित की बेटी मेघना मोहन की द्वारका स्थित एक संपत्ति गिरवी रखी गई थी। लेकिन यह संपत्ति पीड़ित और उनकी बेटी द्वारा वर्ष 2018 में ही बेच दी गई थी। इसके सुबूत पीड़ित के पास मौजूद हैं।