ऐसा क्या हुआ जो भड़काऊ भाषण देने के मामले में आरोपित शरजील इमाम को कोर्ट से मांगनी पड़ी माफी

 

दिल्ली हाईकोर्ट से सोमवार को शरजील इमाम ने माफी मांगी।

कोर्ट ने तय किया है कि इस मामले में 28 मार्च से रोजाना सुनवाई होगी ताकि जल्द इसका निपटारा किया जा सके। इसी क्रम में सोमवार को मामले की सुनवाई होनी थी लेकिन शरजील इमाम का वकील नहीं पहुंचा था।

नई दिल्ली,  संवाददाता। दंगे से पहले जेएनयू, एएमयू समेत कई जगह भड़काऊ भाषण देने के मामले में आरोपित शरजील इमाम कोर्ट में पेश हुआ, लेकिन उसका वकील नहीं आया। अभियोजन पक्ष की तरफ से पांच गवाह पेश किए गए थे, जिन्हें बिना गवाही लौटाना पड़ा। कोर्ट ने शरजील के वकील के अनुपस्थित रहने पर नाराजगी जताई। शरजील ने इसके लिए माफी मांगी। 

दरअसल, दिल्ली दंगे से पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय समेत कई जगह भड़काऊ भाषण देने के राजद्रोह के मामले में शनिवार को नया मोड़ आया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब आरोपित जेएनयू छात्र शरजील को पेश किया गया तो उसने भाषणों को स्वीकार या नकारने से साफ इन्कार कर दिया।

उसकी तरफ से पैरवी कर रहे वकील ने कहा था कि वह इस मामले का पूर्ण ट्रायल चाहते हैं, ताकि अभियोजन अपने दावों को साबित करे। कोर्ट ने तय किया है कि इस मामले में 28 मार्च से रोजाना सुनवाई होगी, ताकि जल्द इसका निपटारा किया जा सके। इसी क्रम में सोमवार को मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन शरजील इमाम का वकील नहीं पहुंचा और कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। इस मामले में शरजील इमाम ने खुद कोर्ट से माफी मांगी। वहीं,

इस मामले में गत 24 जनवरी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के कोर्ट ने शरजील के खिलाफ राजद्रोह करने, गैर कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने, सांप्रदायिक नफरत व अफवाह फैलाने समेत कई आरोप तय किए थे। कोर्ट ने आदेश में कहा था कि शरजील ने भाषणों में भारत की अखंडता और संप्रभुता को चुनौती दी। उसने लगभग हर संस्था, संविधान और लोकतंत्र के विचारों की आलोचना की। धर्मनिरपेक्षता पर संदेह जताया।

यहां तक कि उसने राष्ट्रपिता के खिलाफ अपशब्द कहे। कोर्ट ने माना था कि उसके भाषण पूरी तरह से निराशावादी थे।

वह भाषणों से मुसलमानों को यह समझाने की कोशिश कर रहा था कि उनके समुदाय को संविधान और संविधान बनाने वालों ने वंचित रखा। गत 15 मार्च को शरजील ने इन आरोपों को मानने से इन्कार कर दिया था। इस मामले में शनिवार को सुनवाई होने पर शरजील को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 293 के तहत उससे पूछा कि भाषणों को लेकर अभियोजन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को वह स्वीकार करता है या नहीं। उसने स्वीकार या नकारने से साफ इन्कार कर दिया।साजिश के माले में निर्णय टला दो साल से ज्यादा वक्त से न्यायिक हिरासत में बंद दिल्ली दंगे की साजिश के मामले में आरोपित शरजील इमाम की जमानत पर शनिवार को कोर्ट ने निर्णय टाल दिया।

अब शरजील की जमानत पर 30 मार्च को कोर्ट निर्णय सुनाएगा। इससे बार कई बार कोर्ट उसकी जमानत अर्जी पर निर्णय टाल चुका है। राजद्रोह के मामले में उसकी जमानत अर्जी कोर्ट जनवरी में खारिज कर चुका है। साजिश के मामले में आरोपित खालिद सैफी की जमानत अर्जी पर निर्णय 31 मार्च को सुनाया जाएगा।