गन्ना पर्चियों की कमी पर रुड़की के किसानों में पनप रहा आक्रोश, चीनी मिलों के खिलाफ दी आंदोलन की चेतावनी

 

किसानों ने चीनी मिलों के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।

गन्ने की पर्चियां न मिलने से परेशान किसानों ने चीनी मिलों के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। किसानों ने कहा कि चीनी मिलें बाहर से गन्‍ना की खरीद कर रही है। किसानों के गन्ने के खेत में छिले हुए गन्ने के ढेर लगे हैं।

 संवाददाता, रुड़की: इकबालपुर और लिब्बरहेड़ी चीनी मिल से जुड़े किसान इन दिनों गन्ने की पर्चियां न मिलने से परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि चीनी मिलें बाहर से गन्ना खरीद रही हैं। वहीं मिल संचालकों का कहना है कि वह पर्याप्त इंडेंट प्रतिदिन दे रही है। ऐसे में किसानों ने चीनी मिलों के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।

मार्च का पहला सप्ताह शुरू होने के साथ ही गन्ने को लेकर मारामारी मच गई है। किसानों के गन्ने के खेत में छिले हुए गन्ने के ढेर लगे हैं। वहीं, चीनी मिलों में भी किसान का पांच से छह घंटे इंतजार करने के बाद ही नंबर आ रहा है। किसान राजबीर सिंह, ऋषिपाल सिंह, सुरेन्द्र आदि का कहना है कि मार्च में चीनी मिलों में गन्ने की कमी आना शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार तो स्थिति दिसंबर और जनवरी माह से ही उलट है। आठ से दस दिन इंतजार करने के बाद भी किसानों की गन्ने की पर्चियां नहीं पहुंच पा रही हैं। आरोप है कि इस समय चीनी मिल बाहर का गन्ना सस्ते दाम में खरीद रही है। जिस कारण स्थानीय किसान परेशान हैं। इसके अलावा चीनी मिलों को दूसरे चीनी मिल क्षेत्र में जो क्रय केंद्र आवंटित किए गए हैं, वहां पर खरीद अधिक दी जा रही है जबकि स्थानीय किसानों को कम। गन्ना खरीद को लेकर आए दिन गन्ना समितियों और चीनी मिलों में हंगामे हो रहे हैं।

किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। टकराव की स्थिति बनी हुई है। वहीं, सहायक गन्ना आयुक्त शैलेन्द्र ङ्क्षसह ने बताया कि गन्ना विभाग की ओर से लगातार मानीटरिंग की जा रही है। अभी तक कहीं पर भी नकद गन्ने की खरीद संबंधी कोई शिकायत नहीं मिली है।

कोल्हू में कम दाम भी वजह

रुड़की: गन्ना कोल्हू में इस समय गन्ने के दाम कम बने हुए है। इस समय किसानों का गन्ना 270 से लेकर 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से ही बिक रहा है। जबकि सरकार की ओर से गन्ने का दाम 355 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। मार्च के माह में चीनी मिल और गन्ना कोल्हू के रेट लगभग बराबर हो जाते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। इस वजह से भी गन्ना पर्चियों को लेकर एक मारामारी मची हुई है।