जानिए दिल्ली में तीनों नगर निगमों के एक हो जाने के बाद कितने करोड़ रुपये का विवाद एक बार में हो जाएगा खत्म

 

कानून में संशोधन के बाद दिल्ली नगर निगम बनते ही तीन हजार करोड़ का बड़ा विवाद खत्म हो जाएगा।

तीन निगम बनाए जाने के कुछ वर्ष बाद से ही इस पर विवाद शुरू हो गया। मामला यहां तक जा पहुंचा था कि उत्तरी निगम ने दक्षिणी से किराया न मिलने का आरोप लगाते हुए निगमायुक्त का दफ्तर तक सील कर दिया था।

नई दिल्लीsurender Aggarwal । केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राजधानी के तीनों नगर निगमों (उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी) को एक करने का फैसला लिया है। कानून में संशोधन के बाद दिल्ली नगर निगम बनते ही तीन हजार करोड़ का बड़ा विवाद खत्म हो जाएगा। यह विवाद था सिविक सेंटर के मालिकाना हक से लेकर किराये को लेकर था। तीन निगम बनाए जाने के कुछ वर्ष बाद से ही इस पर विवाद शुरू हो गया। मामला यहां तक जा पहुंचा था कि उत्तरी निगम ने दक्षिणी से किराया न मिलने का आरोप लगाते हुए निगमायुक्त का दफ्तर तक सील कर दिया था।

हालांकि दफ्तर को तत्कालीन महापौर श्याम शर्मा ने खुद ही खोल दिया था, लेकिन अब तक यह विवाद खत्म नहीं हुआ है। दिल्ली के तीनों निगमों को एक करने का कानून सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद लागू होगा, उससे यह विवाद खत्म हो जाएगा। वर्ष 2012 से लेकर अब तक उत्तरी निगम दक्षिणी निगम पर तीन हजार करोड़ रुपये के किराये का दावा करता है, जिससे दक्षिणी निगम शुरू से लेकर अब तक खारिज करता आया है। दरअसल, मामला सबसे पहले वर्ष 2015 में उत्तरी निगम ने दक्षिणी निगम पर 456 करोड़ के किराये का दावा किया था। इसे दक्षिणी निगम ने खारिज कर दिया था।

दक्षिणी निगम का दावा था कि एकीकृत निगम के समय पर बने सिविक सेंटर के निर्माण में उनका भी पैसा लगा था। ऐसे में 40 प्रतिशत की दावेदारी उनकी हैं और 40 प्रतिशत की दावेदारी उत्तरी निगम की है, जबकि 20 प्रतिशत की दावेदारी पूर्वी निगम की है। ऐसे में विभाजन के बाद पूर्वी निगम को मुख्यालय पटपड़गंज में उद्योग सदन दिलाने के लिए दक्षिणी निगम ने लाजपत नगर स्थित अपने दफ्तर से डीएसआइडीसी से अदला-बदली की थी। ऐसे में सिविक सेंटर में उनकी भागीदारी 60 प्रतिशत की है। समय-समय पर यह मामला बढ़ता गया।

आप ने लगाए थे भ्रष्टाचार के आरोप

उत्तरी व दक्षिणी निगम में सिविक सेंटर के किराये के मामले को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। विवाद ऐसे शुरू हुआ कि वर्ष 2021-22 के बजट में निगमायुक्त ने अपने बजट में दक्षिणी निगम का किराया शून्य कर दिया था। इससे आप हमलावर हो गई थी। आप के नेताओं कहना था कि उत्तरी निगम के पास यह किराया आता तो कर्मचारियों के वेतन की समस्या खत्म हो जाती। हालांकि जब स्थायी समिति से लेकर नेता सदन ने इस बजट को अंतिम रूप दिया तो किराया माफ न करने का फैसला लिया गया।

खास बातें

- 324 करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से किराये की मांग करता था उत्तरी निगम

- 28 मंजिला बना है सिविक सेंटर, विभाजन से पहले ही बनकर हो गया था तैयार

- ई-2 ब्लाक को आयकर विभाग को निगम ने दे रखा है पट्टे पर