ममता के भतीजे अभिषेक व उनकी पत्नी की याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

 

ममता के भतीजे अभिषेक व उनकी पत्नी की याचिका को तत्काल सूचीबद्ध कराने पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक व उनकी पत्नी की याचिका पर जल्दी सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। याचिकाकर्ता ने प्रर्वतन निदेशालय द्वारा भेजे गए समन तथा इसपर रोक लगाने से दिल्ली हाई कोर्ट के इनकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

 नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court) ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे व तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजीरा बनर्जी की याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर विचार करने को लेकर सहमति जताई है।

चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच के वरिष्ठ एडवोकेट कपिल सिब्बल और एएम सिंघवी ने बनर्जी दंपती की याचिका पर जल्दी सुनवाई के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। याचिकाकर्ता ने प्रर्वतन निदेशालय (ED) द्वारा भेजे गए समन तथा इसपर रोक लगाने से दिल्ली हाई कोर्ट के इनकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

ED ने अभिषेक व उनकी पत्नी को कथित कोयला तस्करी से संबंधित धन शोधन मामले में 29 मार्च को पेश होने के लिए तलब किया है। इससे पहले अभिषेक दिल्ली में केंद्रीय एजेंसी के सामने पेश हुए थे। तब निदेशालय के अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी। बनर्जी सुबह करीब 11 बजे मध्य दिल्ली में जांच एजेंसी के नए कार्यालय में दाखिल हुए और रात आठ बजे से कुछ पहले निकल गए थे।

अभिषेक का बयान धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया गया था। जांचकर्ताओं द्वारा एकत्र किए गए कुछ सबूत के साथ उनका सामना कराया गया था। सूत्रों के मुताबिक उनसे कोयला तस्करी के आरोपित विनय मिश्रा के बारे में भी पूछा गया। अभिषेक के दो विदेशी बैंकों में हुए लेनदेन को लेकर भी ईडी के अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की है। माना जा रहा है कि कोयला तस्करी का पैसा उन्हीं बैंकों में स्थानांतरित किया गया था। हालांकि अभिषेक ने इससे इन्कार किया और कार्यालय से बाहर निकलते समय, सांसद ने कहा कि वह कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं और इसलिए उन्होंने जांच में सहयोग किया है।

बता दें कि 27 नवंबर, 2020 को सीबीआई ने ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (ईसीएल) के कई अफसरों और कर्मचारियों के साथ ही अनूप माजी उर्फ लाला, सीआइएसएफ और रेलवे के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप लगाया गया था कि ईसीएल, सीआइएसएफ, भारतीय रेलवे और संबंधित अन्य विभागों के अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत से ईसीएल के लीजहोल्ड क्षेत्र से कोयले की चोरी की गई।