यूक्रेन से सकुशल लुधियाना लौटीं दो बेटियां और बेटा, नहीं भूल रहा खौफनाक मंजर

 

सूमी से लौटी मानसी पिता राजिंदर और माता मीना के साथ (दाएं) लक्ष्य मां के साथ। सौ. स्वजन

जीके एस्टेट मुंडिया कलां के रहने वाले 19 वर्षीय लक्ष्य गुलाटी भी घर लौटे। लक्षय खीरकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस सेकेंड इयर के स्टूडेंट मौत के मुंह से बचकर जब बच्चे अपने अपने घर पहुंचे तो वहां जशन का माहौल था।

 संवाददाता, लुधियाना। Russia Ukraine War: यूक्रेन में फंसे स्टूडेंटस की घर वापसी लगातार हो रही है। जिले के रहने वाले ज्यादातर स्टूडेंटस घर लौट चुके हैं। अब कुछ ही स्टूडेंटस यूक्रेन में फंसे हैं। रूस यूक्रेन युद्ध के साए में करीब 15 दिन बिताने के बाद शुक्रवार को ताजपुर रोड के विश्वकर्मा नगर की रहने वाली दो सहेलियां मानसी कुंडल व प्रभनीत कौर भी अपने घर लौट आई। दोनों सूमी सिटी के सूमी स्टेट यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस फोर्थ ईयर की पढ़ाई कर रही थी। वहीं दूसरी तरफ जीके एस्टेट मुंडिया कलां के रहने वाले 19 वर्षीय लक्ष्य गुलाटी भी घर लौटे।

घराें में जश्न का माहाैल

लक्षय खीरकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस सेकेंड ईयर के स्टूडेंट मौत के मुंह से बचकर जब बच्चे अपने अपने घर पहुंचे, तो वहां जशन का माहौल था।  हालांकि इस दौरान स्वजनों के आंखों से खुशी के आंसू लगातार बह रहे थे। दूसरी तरफ घर लौटे तीनों स्टूडेंटस ने जब यूक्रेन रूस युद्ध की भयावहता के बारे में बताया, तो परिवार वालों के रौंगटे खड़े हो गए। स्टूडेंटस के चेहरों पर भी डर साफ नजर आ रहा था। स्टूडेंटस ने बताया कि यूक्रेन से बार्डर तक पहुंचने में देश के राष्ट्रीय ध्वज ने बहुत मदद की। तिरंगा उनके लिए सुरक्षा कवच बना रहा।

घर आकर नई जिंदगी मिली

यक्रेन से लौटी मानसी कौंडल कहती हैं कि 24 फरवरी से 10 मार्च तक के यूक्रेन में बिताएं गए गए वक्त को वह कभी नहीं भूल सकती। अब भी उनकी रूह कांप उठती है। क्योंकि, 15 दिनों तक उनके उपर मौत मंडरा रही थी। 14 दिनों तक यूनिवर्सिटी के तहखाने में भूख प्यास, कड़ाके की ठंड से जूझते हुए उनकी हिम्मत जवाब दे रही थी। ऐसा लग रहा था, जैसे अब जिंदगी साथ छोड़ देगी। लेकिन, माता पिता की दुआएं और इश्वर की कृपा से मौत से लड़कर घर लौटने पर बहुत ज्यादा खुशी हो रही है। ऐसा लग रहा है, जैसे नई जिंदगी मिली हो। यूक्रेन से पौलेंड बार्डर तक पहुंचने के दौरान हमारा राष्ट्रीय ध्वज सुरक्षा कवच बना रहा। मानसी ने बताया कि घर आने पर उनका जबरदस्त वेलकम किया गया। पिता राजिंदर सिंह, मां मीना, भाई, दादी, चाचा चाची ने गले लगाकर

माता-पिता की दिन रात की प्रार्थनाओं ने बचाया

यूक्रेन से लौटी प्रभनीत कौर ने कहा कि घर आकर अब उन्हें अच्छा लग रहा है। मा बाप की प्रार्थनाओं की वजह से ही सुरक्षित घर वापिस आ सकी हूं। क्योंकि वहां हालात बेहद बदतर थे। यूनिवर्सिटी के तहखाने में रहने से लेकर बार्डर तक पहुंचने के दौरान बहुत ही भयावह स्थिति को झेला। खौफनाक माहौल अब भी आंखों के सामने घूम रहा है। जिंदगी में दोबारा कभी भी ऐसे हालात नहीं देखना चाहूंगी। परिवार से मिलने के बाद जान में जान आई। प्रभनीत ने कहा कि घर पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत हुआ।

राष्ट्रीय ध्वज ने रोमानिया बार्डर तक सुरक्षित पहुंचा

जीके एस्टेट मुंडिया कलां के रहने वाले 19 वर्षीय लक्ष्य गुलाटी भी सकुशल घर लौट आए हैं। पिता अमिताभ गुलाअी व मां एकता गुलाटी बेटे को लेने खुद एयरपोर्ट पहुंचे। जहां एक दूसरे को देखकर तीनों रोने लग गए। लक्ष्य साल 2020 में खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस करने गए थे। वहां वह अभी सेकेंड इयर में पढ़ रहे थे। लक्ष्य ने बताया कि भारत तक पहुंचने के लिए उन्हें खौफनाक मंजर से गुजरना पड़ा। 24 से 2 मार्च तक बंकर में गुजारने पड़े। इस दौरान कई दिनों तक भूखों रहना पड़ा। बंकर में खाने-पीने के सामान के लिए अराजक स्थिति बन गई है। 3 मार्च को रिस्क लेकर पैदल ही घर से निकलें। मीलों पैदल चलकर रेलवे स्टेशन पहुंचे। स्टेशन पर हालात देखे, तो रौंगटे खड़े हो गए।

प्राइवेट बस के जरिये गांव पोसीजन से रोमानिया के लिए निकले

यूक्रेनियन पुलिस व आर्मी केवल अपने नागरिकों को पहल दे रही थी। भारतीय स्टूडेंट के साथ बहुत ज्यादा बुरा व्यवहार हो रहा था। ऐसे में मजबूर होकर प्राइवेट बस के जरिये गांव पोसीजन से रोमानिया के लिए निकले। बिना रूके बम धमाकों के बीच 50 घंटे में 1500 किलोमीटर का सफर तय करके रोमानिया बार्डर तक पहुंचे। इस दौरान इंडियन फ्लैग ने हमारी काफी मदद की। फलैग की वजह से यूक्रेन में अलग अलग जगहों की चैक पोस्ट पर हमें नहीं रोका गया और यूक्रेनियन सैनिकों व रूसी सैनिकों ने रोमानिया बार्डर तक पहुंचाने में मदद की।