खजनी विधानसभा में त्रिकोणीय हो गया आमने-सामने का मुकाबला

 

UP Vidhan Sabha Chunav 2022: यहां पढ़ें, खजनी विधानसभा का चुनावी सीन। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

UP Vidhan Sabha Chunav 2022 गोरखपुर की खजनी व‍िधानसभा सीट पर आमने सामने की लड़ाई अचानक त्र‍िकोणीय मुकाबले में फस गई है। लोगों में व‍िधायक रहे संत प्रसाद का टिकट कटने का भी आक्रोश है। चुनाव पर इसका भी असर पड़ा है।

गोरखपुर,  संवाददाता। खजनी सीट से लगातार दो बार विधायक चुने गए भाजपा के संत प्रसाद का टिकट काटकर श्रीराम चौहान को मैदान में उतारने वाली भाजपा के मुकाबले सपा की रूपावती बेलदार और बसपा के विद्यासागर उर्फ छोटे भाई मजबूती से लड़ते नजर आ रहे हैं। चुनाव से पहले जहां इस सुरक्षित सीट पर लड़ाई आमने-सामने की मानी जा रही थी, वहीं मतदान के दिन तक आते-आते मामला त्रिकोणीय हो गया। किसी को मोदी-योगी का गठजोड़ मजबूत नजर आ रहा है तो कोई बसपा प्रत्याशी की सवर्णों में अ'छी पैठ बताकर उनकी दावेदारी को मजबूत बताता रहा। मतदाताओं का रूझान बता रहा कि इस सीट पर कुछ भी हो सकता है।

टिकट कटने का द‍िखा गुस्‍सा

खजनी कस्बे में मतदान के बाद तेज कदमों से घर की ओर वापस जा रहे मनोज कुमार ने बातचीत में बताया कि 'विधायक जी का टिकट कटने को लेकर समर्थकों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। पार्टी भले ही कह रही हो कि कहीं कोई विरोध नहीं है, पर अंदरखाने कुछ न कुछ तो है। मोदी-योगी का जादू चल रहा है, लेकिन बसपा भी अ'छा चुनाव लड़ रही है। देखिए क्या होता है।

'जिसने पेट की भूख शांत की, उसको कैसे छोड़ सकते हैं'

कस्बे से कुछ दूर आगे बढऩे पर मिले रामकिशुन भी कई बार मन टटोलने के बाद बोल पड़े, 'जिसने पेट की भूख शांत की, उसको कैसे छोड़ सकते हैं। कोरोना वाले समय में जब कुछ नहीं सूझ रहा था कि तब भी राशन लगातार मिलता रहा। बातचीत के दौरान वहां पहुंचे संकटा प्रसाद बोले, 'कोई पूरे जीवन तो बैठाकर खिलाएगा नहीं, इस बार नया चुनेंगे तो नया काम होगा।' मतदान केंद्र से बाहर निकलकर सड़क पर पहुंचने के दौरान औंजी गांव से खजनी की ओर आते दिखे सुरेश वोट के सवाल पर बोले, 'अनुसूचित और अगड़ों का गठजोड़ सबकी गणित इस बार फेल कर देगा।' कौन जीतेगा यह कहना मुश्किल है, तीनों प्रत्याशी दमदारी से लड़ रहे हैं।

मतदान प्रतिशत में 1.53 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी

खजनी में वर्ष 2017 की तुलना में मतदान प्रतिशत में 1.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी को प्रत्याशियों के समर्थक अपने पक्ष में बताते नजर आए। राम सिंह कहते हैं कि, 'इस बार पहले के मुकाबले मतदान ज्यादा हुआ है तो आप खुद अंदाज लगा लें कि जब ज्यादा मतदान होता है तो किसी पार्टी को फायदा होता है।' हालांकि काफी टटोलने के बाद भी वह फायदे में जाने वाली पार्टी का नाम बताने की जगह मुस्कुराते रहे।