दांपत्य जीवन में प्रेम बरकरार रखना चाहते हैं तो इन बातों का रखें ख्याल

 

अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह से निभाएं।

किसी ने सही कहा है कि जोडिय़ां तो स्वर्ग में बनती हैं लेकिन आपस में प्रेम बरकरार रखने के लिए प्रयास तो धरती पर मौजूद लोगों को ही करना पड़ता है। दांपत्य जीवन में प्रेम बरकरार रखना चाहते हैं तो दोनों को ही कुछ छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना होगा...

यदि आप अपने दांपत्य जीवन में हमेशा बहार बनाए रखना चाहती हैं तो रोजमर्रा के जीवन में अपनी-अपनी दिनचर्या को सुचारू रूप से पूरा करते हुए एक-दूसरे के मनोभावों को समझने का प्रयास करें। इसके साथ ही आपस में प्रेम बरकरार रखने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा।

जिम्मेदारियां निभाना : दांपत्य जीवन में यह पति-पत्नी की जिम्मेदारी होती है कि दोनों ही अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कुशलतापूर्वक और खुशी-खुशी करें। यदि दोनों में से कोई भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही तरह से नहीं करता है तो इससे आपस में तनाव होता है और प्रेम की नदी भी धीरे-धीरे सूखने की कगार पर आ जाती है। इस संदर्भ में रिलेशनशिप एक्सपर्ट डा. शालिनी सिंह का कहना है कि दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास तभी बरकरार रहता है जब दोनों ही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कुशलतापूर्वक करते हैं। यदि आप दोनों अपनी जिम्मेदारियां सही तरह से नहीं निभाते हैं तो इसका मतलब है कि आप अपने जीवनसाथी की परवाह नहीं करते हैं साथ ही आपको अपने साथी की भावनाओं की भी परवाह नहीं है।

अपशब्दों का प्रयोग न करें : कई बार ऐसा होता है कि पति-पत्नी आपस में बात करते-करते मनमुताबिक बात न होने पर या अचानक से किीस बात को लेकर क्रोध में आने पर अपशब्दों का प्रयोग करने लगते हैं। इस संदर्भ में रिलेशनशिप एक्सपर्ट डा. अनुप्रिया गुप्ता का कहना है कि भले ही आप ही कितने परेशान क्यों न हों या आप पर कितनी ही जिम्मेदारियां न हों, लेकिन आपस में बात करते समय कभी भी अपशब्दों का प्रयोग न करें। इस बात के लिए पति-पत्नी दोनों ही मन में यह पक्की धारणा बना लें कि चाहे कैसी भी स्थितियां आएंगी हम आपस में अपशब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे। इससे आपके रिश्ते में हमेशा प्रेम और विश्वास बना रहेगा और कभी भी खटास नहीं आएगी।

प्रशंसा भी जरूरी है : अक्सर देखने में आता है कि पति-पत्नी आपस में एक-दूसरे की प्रशंसा करना भूल जाते हैं। कारण, दोनों की यह सोच होती है कि आपस में प्रशंसा करने की क्या जरूरत? इस संदर्भ में रिलेशनशिप एक्सपर्ट डा. शालिनी सिंह का कहना है कि ऐसा सोचना सही नहीं है। कारण, जिस प्रकार से पेड़-पौधे लगाकर उनकी देखरेख करना और उनमें पानी देना जरूरी होता है। ठीक उसी प्रकार से समय-समय पर आपस में एक-दूसरे की प्रशंसा करना, धन्यवाद कहना और सारी बोलना जरूरी होता है। प्रशंसा में कहे गए दो शब्द मन के भावों को बदल देते हैं। इससे हमारे मन में अपने साथी के लिए और अधिक सम्मान का भाव पनपता है।

किचन में सहायता : यदि आप दोनों कामकाजी हैं और साथ में रहते हैं अर्थात दोनों एक-दूसरे से दूर अलग-अलग शहर में नहीं रह रहे हैं साथ ही आपने घर में खाना बनाने के लिए सहायिका नहीं रख रखी है या घरेलू कार्यों को करने के लिए अलग-अलग लोगों की सेवाएं नहीं ले रखी हैं तो कभी न कभी ऐसा होता होगा कि आप किचन के काम करते-करते ऊब जाती होंगी, लेकिन आपके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं होता है कि किचन के कामों से फुर्सत मिल जाए। यदि आप बाहर से खाना मंगवाती हैं तो भी कितने दिन बाहर का खाना खा सकती हैं। ऐसे में मन में यही विचार आता है कि काश कोई किचन के कामों में मेरी मदद करे। पति भी व्यस्तता के कारण चाहकर भी आपकी मदद नहीं कर पाते हैं। ऐसी समस्या होने पर इसका समाधान क्या हो सकता है?

इस संदर्भ में रिलेशनशिप एक्सपर्ट डा. मीनाक्षी शर्मा का कहना है कि इसका सबसे आसान सा उपाय यह है कि छुट्टी के दिनों में या जब कभी पति पर कामों का दबाव कम हो तो आप अपने जीवनसाथी से किचन के कामों में मदद मांग सकती हैं। यदि आप अपने जीवनसाथी से विनम्रतापूर्वक किचन के कामों में मदद मांगेंगी तो वह खुशी-खुशी आपकी मदद करने के लिए तैयार हो जाएंगे। आप पति से यह भी अनुरोध कर सकती हैं कि उन्हें जो भी डिश बनाना अच्छा लगता है वह वो डिश तैयार कर सकते हैं।

कहते हैं कि हर एक इंसान के अंदर एक बेहतर कुक छिपा होता है। बस उसे मौका नहीं मिलता है। इसलिए वह अपने हुनर को आजमा नहीं पाता है। इसलिए जब कभी आपका मन खाना बनाने का न हो रहा हो या आपकी तबियत सही न हो या फिर आप बहुत अधिक थकी हुई हों तो किचन के कामों में जीवनसाथी की मदद लेकर अपने काम को थोड़ा हल्का कर सकती हैं। एक बार आप पति को किचन में काम करने का मौका देकर तो देखिए। हां, उनसे इस बात का विनम्र अनुरोध कर लें कि वह किचन में काम करते हुए ऐसा न करें कि बाद में आपको सारा फैला काम समेटना पड़ जाए और आपको राहत मिलने के बजाय और अधिक तनाव हो जाए।