दिल्ली के एक थाने में एक आरोपित को छुड़ाने एक साथ पहुंच गई दो पत्नियां, मच गया हंगामा, जानिए और क्या-क्या हुआ?

 

दोनों महिलाओं ने खुद को पकड़े गए आरोपित की पत्नी बताया और उसे छोड़ने को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।

थाने में मौजूद पुलिसकर्मी दोनों को समझाने की कोशिश करने लगे और हंगामा करने से रोकने का प्रयास किया लेकिन दोनों किसी को सुनने के लिए तैयार नहीं थीं। ऐसे में मौके पर मौजूद एसआइ अरुण ने उनका वीडियो बनाना शुरू किया।

नई दिल्ली,  संवाददाता। साउथ रोहिणी थाने में शुक्रवार की देर रात उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब दो महिलाओं ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। आश्चर्यजनक बात यह थी कि दोनों ही महिलाएं खुद को पकडे़ गए आरोपित की पत्नी बता रहीं थीं। इस बाबत साउथ रोहिणी थाने में दोनों महिलाओं के खिलाफ मारपीट और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया।

जानकारी के अनुसार एसआइ प्रशांत शुक्रवार रात साउथ महेश बरवा नाम के व्यक्ति को एक मामले में पकड़ कर थाने लाए थे। कुछ देर बाद थाने में अल्का और हेमलता नाम की दो महिलाएं भी पहुंच गई। महेश को पुलिसकर्मी खाना खिलाने के बाद थाने के लाकअप में बंद करने जा रहे थे। रोहिणी जिले के डीसीपी प्रणव तायल के अनुसार दोनों महिलाओं ने खुद को पकड़े गए आरोपित की पत्नी बताया और उसे छोड़ने को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।

थाने में मौजूद पुलिसकर्मी दोनों को समझाने की कोशिश करने लगे और हंगामा करने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन दोनों किसी को सुनने के लिए तैयार नहीं थीं। ऐसे में मौके पर मौजूद एसआइ अरुण ने उनका वीडियो बनाना शुरू किया। इस पर दोनों महिलाओं ने उन पर हमला कर दिया और उनका मोबाइल फोन छीनकर तोड़ दिया। दोनों को काबू करने पहुंची एक महिला सिपाही के साथ भी मारपीट की। दोनों को पुलिसकर्मियों ने काबू किया और पीडि़तों के बयान के आधार पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया गया।

अदालत परिसर के अंदर बंदरों को खाना खिलाने से सख्ती से करें परहेज

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं, वादियों और स्टाफ सदस्यों को अदालत परिसर के अंदर बंदरों को खाना खिलाने से सख्ती से परहेज करने को कहा है। शुक्रवार को अपनी प्रशासनिक शाखा द्वारा जारी एक परिपत्र में, उच्च न्यायालय ने सभी संबंधित व्यक्तियों से यह सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया कि अदालत भवनों और सभी ब्लॉकों की खिड़कियां खुली या खुली न रहें।

डिप्टी रजिस्ट्रार जावेद खान द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि इस अदालत के सभी अधिवक्ताओं वादियों, कर्मचारियों के सदस्यों से भी अनुरोध है कि वे अदालत परिसर के भीतर बंदरों को खाना खिलाने से परहेज करें। कोर्ट ने 28 फरवरी को एक सर्कुलर भी जारी किया था जिसमें आदेश दिया गया था कि उसके परिसर में बंदर और कुत्ते जैसे आवारा जानवरों को नहीं खिलाया जा सकता है। अदालत ने कहा था कि यह उसके संज्ञान में आया है कि इसके विपरीत निर्देश दिए जाने के बावजूद कुछ वकील, वादी, कर्मचारी, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान अभी भी आवारा जानवरों को खाना खिला रहे हैं।