चुनाव नतीजों के बाद जुटेंगे क्षेत्रीय दलों के दिग्गज, विपक्षी एकजुटता को आगे बढ़ाने की एक बार फिर से होगी कोशिश

 

विपक्षी एकजुटता को आगे बढ़ाने की एक बार फिर से कोशिश शुरू होगी। (फाइल फोटो)

क्षेत्रीय पार्टियों को एक मंच पर लाकर विपक्षी एकता की इस पहल की अगुआई बंगाल की मुख्यमंत्री तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी करेंगी। ममता बनर्जी ने पांच राज्यों के चुनाव के बाद गैर कांग्रेसी विपक्षी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाने को लेकर तमाम क्षेत्रीय दिग्गजों से बातचीत कर ली थी।

नई दिल्ली,  ब्यूरो। पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आने के बाद विपक्षी एकजुटता को आगे बढ़ाने की एक बार फिर से कोशिश शुरू होगी। इस सिलसिले में संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत के साथ ही क्षेत्रीय दलों के दिग्गजों का राजधानी दिल्ली में जुटान होगा। क्षेत्रीय पार्टियों को एक मंच पर लाकर विपक्षी एकता की इस पहल की अगुआई बंगाल की मुख्यमंत्री तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी करेंगी। कांग्रेस के साथ चल रही खींचतान के बीच ममता बनर्जी ने पांच राज्यों के चुनाव के बाद गैर कांग्रेसी विपक्षी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाने को लेकर पहले ही तमाम क्षेत्रीय दिग्गजों से बातचीत कर ली थी।

कांग्रेस से खींचतान के बीच ममता बनर्जी करेंगी मुहिम की अगुआई

बताया जाता है कि अब इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए उनका 14 मार्च को दिल्ली का दौरा प्रस्तावित है। इस यात्रा के दौरान वे राजधानी में कुछ दिन प्रवास कर क्षेत्रीय नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश करेंगी। गैर कांग्रेसी विपक्षी मुख्यमंत्रियों की प्रस्तावित बैठक के लिए उन्होंने तमिलनाडु के सीएम द्रमुक नेता एमके स्टालिन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव से लेकर झामुमो नेता झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन आदि से बात भी की थी। सभी ने चुनाव बाद बैठक पर हामी भरी थी।

तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव ने तय किया है कि विपक्षी एकता की इस पहल के लिए 14 मार्च को वे फिर दिल्ली आएंगे। क्षेत्रीय दलों को एकजुट कर कांग्रेस से इतर फेडरल फ्रंट बनाने के हिमायती रहे केसीआर इसी हफ्ते दिल्ली आए भी थे। मगर उत्तर प्रदेश चुनाव की हलचल और यूक्रेन-रूस युद्ध की छाया के चलते उनकी विपक्षी नेताओं से बातचीत नहीं हो पाई। भाजपा नेतृत्व से इन दिनों नाराज दिख रहे वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के साथ केसीआर की चर्चा जरूर हुई।

जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी ने उत्तर प्रदेश चुनाव में समाजवादी पार्टी के पक्ष में प्रचार करने के लिए वाराणसी यात्रा के दौरान अखिलेश यादव से भी इस बारे में चर्चा की थी। ममता ही नहीं, समूचे विपक्ष की निगाह उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजों पर है। इसलिए विपक्षी नेताओं की बैठक की तारीख 10 मार्च के परिणामों के बाद तय की जाएगी। हालांकि तृणमूल प्रमुख और केसीआर समेत कुछ अन्य क्षेत्रीय दलों के नेताओं के 14 मार्च को राजधानी पहुंचने के प्रस्तावित कार्यक्रम में अभी तक कोई बदलाव नहीं हुआ है।

वैसे विपक्षी एकता के लिहाज से क्षेत्रीय दलों के मुख्यमंत्रियों को एक मंच पर लाने की इस पहल को आगे बढ़ाना दीदी के लिए आसान नहीं है, क्योंकि कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार चला रहे हेमंत सोरेन हों या उद्धव ठाकरे, दोनों के लिए कांग्रेस से अलग होने का फिलहाल विकल्प नहीं है। शिवसेना पहले ही साफ कर चुकी है कि कांग्रेस के बिना विपक्षी एकता की बात आगे नहीं बढ़ेगी। इसी तरह द्रमुक और कांग्रेस का गठबंधन न केवल बहुत पुराना है, बल्कि स्टालिन तथा राहुल गांधी के आपसी रिश्ते भी सद्भावपूर्ण हैं।