रूसी सेना अब डोनबास क्षेत्र पर करेगी फोकस, क्‍या अपनी हार छ‍िपाने के लिए रूस ने बदली रणनीति, जानें क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ

 

यूक्रेन को लेकर रूस ने अपनी रणनी‍ति में बदलाव किया है।

यूक्रेन को लेकर रूस ने अपनी रणनी‍ति में बदलाव करते हुए अब अपना फोकस डोनबास इंडस्ट्रियल एरिया पर करने की बात कही है। क्‍या अपनी हार छ‍िपाने के लिए रूस ने अपनी रणनीति बदली है। जानें इस बारे में विशेषज्ञों की राय...

वाशिंगटन, एपी। यूक्रेन को लेकर रूस ने अपनी रणनी‍ति में बदलाव किया है। अधिकारियों का कहना है कि रूसी सेना जारी लड़ाई के बीच यूक्रेन में में अब अपना फोकस कीव से हटाती हुई नजर आ रही है। रूसी सेना का ध्‍यान यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में मौजूद डोनबास इंडस्ट्रियल एरिया पर है। अधिकारियों का कहना यह युद्ध के नए चरण की शुरुआत हो सकती है। हालांकि रूस की इस रणनीति के क्‍या नतीजे होंगे इसे लेकर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। जानें क्‍या है इस बारे में विशेषज्ञों की राय... 

क्‍या हैं रूस के पीछे हटने के मायने 

बता दें कि रूसी सेना के उपप्रमुख कर्नल जनरल सर्गेई रुड्सकोई ने जब यह कहा कि रूसी सेना ने अपने पहले चरण के विशेष सैन्य अभियान में प्रमुख लक्ष्‍यों को हासिल कर लिया है। उन्‍होंने यह भी दावा किया कि रूसी बलों ने यूक्रेन की लड़ाकू सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। इसके साथ ही उन्‍होंने एलान किया कि अब रूसी सेनाएं अपने मुख्य लक्ष्य यानी डोनबास की आजादी पर फोकस करेंगी। रूस के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

यूक्रेन के तगड़े पलटवार से हो रहा नुकसान

दरअसल अमेरिका और अन्य देशों ने यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति बढ़ा दी है। इससे यूक्रेन के कई हिस्‍सों में पासा पलटता नजर आ रहा है। यूक्रेनी सेना की ओर से मिल रहे तगड़े जवाब के चलते रूसी सेना काफी दबाव में है। हफ्ते की शुरुआत में यूक्रेन को ब्‍लैक सी तट पर खड़े एक रूसी जंगी बेड़े को तबाह करने में कामयाबी मिली थी। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि जाहिर है कि रूस को यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों में तगड़े पलटवार का सामना करना पड़ रहा है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति के रुख में भी आया बदलाव

वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने युद्ध खत्‍म करने के लिए रूस से बातचीत की अपील की है। हालांकि उन्‍होंने साफ कर दिया है कि यूक्रेन किसी भी सूरत में अपनी जमीन नहीं छोड़ेगा। इसके साथ ही उन्‍होंने रूस से निष्पक्ष शर्तें और क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी मांगी। उन्‍होंने साफ कर दिया कि यूक्रेनी लोग कुछ भी गलत स्वीकार नहीं करेंगे। यूक्रेनी राष्‍ट्रपति के मजबूत रुख से भी स्‍पष्‍ट है कि यूक्रेन अपने क्षेत्र और अपने भूभाग के बदले कोई समझौता नहीं करेगा।

क्‍या थकने लगी है रूसी फौज

वहीं अमेरिका के एक रक्षा अधिकारी ने कहा कि एक महीने से जारी लड़ाई के चलते रूसी सेना धीरे धीरे कमजोर पड़ती नजर आ रही है। पहले तो उसने यूक्रेन पर तगड़े हमले बोले लेकिन अब कीव जीतने में उनकी दिलचस्पी में कमी आई है। भले ही रूस की ओर से हवाई हमले जारी हैं ले‍किन अब वह आगे नहीं बढ़ाना चाहता है। यही कारण है कि उनका फोकस अब डोनबास पर केंद्रित होने जा रहा है। सनद रहे पुतिन अब तक नहीं स्‍पष्‍ट कर पाए हैं कि यूक्रेन को लेकर उनके इरादे क्या हैं।

दलदल से निकलने का रास्ता तलाश रहा रूस

हालांकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों यह बयान भी दिलचस्‍प है कि क्‍या वाकई रूसियों ने अपना फोकस बदला है। वहीं वाशिंगटन थिंक टैंक लेक्सिंगटन इंस्टीट्यूट के एक रक्षा विश्लेषक लारेन थाम्पसन का कहना है कि रूस अब यूक्रेन में बने दलदल से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है। यह डोनबास पर ध्यान केंद्रित करने की बात कह कर अपनी हार को स्वीकार किए बिना सेनाओं को वापस बुलाने का एक तरीका हो सकता है।

क्‍या कंफ्यूज हैं राष्‍ट्रपति पुतिन

इस बारे में सीआईए के पूर्व निदेशक और रक्षा सचिव राबर्ट गेट्स कहते हैं कि पुतिन को यूक्रेन में अपनी सेना के प्रदर्शन से निराश होना पड़ा है। रूसी सैनिकों को यह पता ही नहीं कि उनका लक्ष्‍य क्या है। यही नहीं उनके साथ कमान एंड कंट्रोल के स्‍तर पर भी बड़ी समस्याएं आ रही हैं। यह रूस की घटिया रणनीति को दिखलाता है। अफगानिस्तान और अन्य जगहों पर लड़ाइयों पर शोध करने वाले कोलंबिया विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर स्टीफन बिडल का कहना है कि अभी भी रूस के इरादे को समझना मुश्किल है।