दिल्ली पुलिस के हवलदार ने कहा नहीं दे सकता पत्नी और नाबालिग बच्चे को गुजारा भत्ता, तीस हजारी कोर्ट ने दी ये नसीहत

 

कोर्ट ने कहा कि शिक्षा ऋण की किश्त भरने से अधिक अपने परिवार की गरिमा को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

कोर्ट ने कहा एक अनुशासित बल का सदस्य होने के नाते उससे कानून के पालन की उम्मीद अधिक है। कोर्ट ने उस दलील को अस्वीकार कर दिया कि वह शिक्षा ऋण की किश्तें भरने की वजह से गुजारा भत्ता देने में सक्षम नहीं है।

नई दिल्ली, संवाददाता। पत्नी और नाबालिग बच्चे को गुजारा भत्ता देने से इन्कार करने के मामले में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के एक हवलदार को नसीहत दी है। कोर्ट ने कहा एक अनुशासित बल का सदस्य होने के नाते उससे कानून के पालन की उम्मीद अधिक है। कोर्ट ने उस दलील को अस्वीकार कर दिया कि वह शिक्षा ऋण की किश्तें भरने की वजह से गुजारा भत्ता देने में सक्षम नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि शिक्षा ऋण की किश्त भरने से अधिक अपने परिवार की गरिमा को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

तीस हजारी कोर्ट के महानगर दंडाधिकारी ने अपने एक आदेश में 16 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि जब गुजारा भत्ता के लिए रकम तय की गई थी तब वेतन को पांच हिस्सों में बाटा गया था। इसमें तीन हिस्से हवलदार और उसके बुजुर्ग माता-पिता के लिए थे जबकि दो हिस्से पत्नी व बच्चों के लिए थे। इस दौरान हवलदार ने शिक्षा ऋण की किश्त चुकाने के चलते गुजारा भत्ता चुका पाने में असमर्थता जाहिर की थी। कोर्ट ने उसे हिदायत देने के साथ नियमित तौर पर गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया।

उधर निवेशकों को गलत जानकारी देकर करोड़ों रुपए ठगने के कई मामलों के आरोपित राजेश अंबवानी को सशर्त जमानत दी गई है। पटियाला हाउस कोर्ट के मुख्य महानगर दंडाधिकारी पंकज शर्मा ने आरोपित को निर्देश दिया कि वह हमेशा गूगल मैप पर एक पिन डालकर जांच अधिकारी के साथ अपना स्थान साझा करेगा। साथ ही वह ना तो किसी गवाह से संपर्क करेगा और ना किसी प्रकार के साक्ष्य को नष्ट करने की कोशिश करेगा।

दर्ज मुकदमे के अनुसार आरोपित ने स्वयं को दिल्ली आइआइटी से एम. टेक बताया और खुद को उन लोगों के वित्तीय सलाहकार के रूप में भी दर्शाया जो इक्विटी शेयरों के व्यापार में पर्याप्त लाभ कमा रहे थे। उसने पीड़ितों को अपना पैसा निवेश करने के लिए प्रेरित किया। उनके निवेश पर प्रति माह चार फीसदी की वापसी सुनिश्चित की। इसके बाद अंबवानी ने न केवल निवेशकों को धोखा दिया, बल्कि अपने निवेश से गलत लाभ प्राप्त करने के लिए केवाईसी दस्तावेज पर निवेशकों के हस्ताक्षर भी किए।

आरोपित के अधिवक्ता ने कोर्ट में बताया कि शिकायतकर्ताओं को पता था कि उनका पैसा शेयर बाजार में निवेश किया जाएगा। बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना होती है। वे कैसे मान सकते है कि निवेश की गई राशि का चार फीसदी का रिटर्न मिलता है। ऐसे में उनके मुवक्किल ने कोई धोखाधड़ी नहीं की है। ऐसे में उन्हे जमानत दी जानी चाहिए।