अब सरकारी कर्मचारियों के लिए तालिबान का फरमान, दाढ़ी के साथ अनिवार्य किया ये ड्रेस कोड

 

काम पर नहीं आ सकेंगे बगैर दाढ़ी, तालिबान सरकार ने लगाई रोक- सूत्र

अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार ने अब सरकारी कर्मचारियों के लिए निर्देश जारी किया है जिसमें दाढ़ी के साथ स्थानीय कपड़े जिसमें लंबा और ढीला कुर्ता व पायजामे के साथ टोपी या इमामा (hat or turban) को पहनना अनिवार्य किया गया है।

 काबुल, रायटर्स। अफगानिस्तान में बीते साल अगस्त से काबिज तालिबान एक के बाद एक फरमान जारी करता जा रहा है। अब इसने यहां के सरकारी कर्मचारियों को निशाने पर लिया है। इस क्रम में तालिबान प्रशासन के सार्वजनिक नैतिकता मंत्रालय (public morality ministry) ने सोमवार को सभी सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण किया। इसके तहत कार्यालय आने वाले सभी कर्मचारियों की बढ़ी दाढ़ी व ड्रेस कोड की भी जांच की गई।

ड्रेस कोड नहीं मानने पर जा सकती है नौकरी

सूत्रों ने बताया कि प्रोपैगेशन आफ वर्च्यू एंड प्रिवेंशन आफ वाइस के लिए मंत्रालयों  के प्रतिनिधियों ने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए निर्देश जारी किया है कि वे अपनी दाढ़ी न हटाएं और न ही स्थानीय कपड़े जिसमें लंबा और ढीला कुर्ता व पायजामे के साथ टोपी या इमामा (hat or turban) पहनना अनिवार्य किया गया है।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्करों को यह कह दिया गया है कि ड्रेस कोड का पालन नहीं करने पर उन्हें कार्यालयों के परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी और तो और नौकरी से भी निकाला जा सकता है। 

लड़कियों की शिक्षा के विरोध में रहा है तालिबान

लड़कियों की शिक्षा को लेकर तालिबान शुरू से ही विरोध में रहा है। तालिबान ने अफगानिस्तान में एयरलाइनों से यहां तक कह दिया है कि महिलाएं पुरुष संरक्षक के बिना घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में नहीं जा सकती हैं। और इसे लेकर अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि ने भी उम्मीद जताई है कि लड़कियों की शिक्षा पर तालिबान आने वाले दिनों में यू-टर्न लेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा था कि अफगानिस्तान के इस्लामिक शासकों ने सभी लड़कियों को हाई स्कूल की कक्षाओं में लौटने की अनुमति देने वाले फैसले को पलट दिया, जिसके बाद बैठक रद की गई।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि डेबोरा लियोन ने कतर में तालिबान के सदस्य सुहैल शाहीन से कहा कि लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने के तालिबान के फैसले को यदि वापस नहीं लिया गया तो इससे अफगानिस्तान को अपूरणीय क्षति होगी। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने छात्राओं की शिक्षा पर तालिबान द्वारा प्रतिबंध लगाने की आलोचना की है।