पाकिस्‍तान में इमरान खान के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव, क्‍या पड़ोसी मुल्‍क में हैं गृहयुद्ध के आसार? एक्‍सपर्ट व्‍यू

 

पाकिस्‍तान में इमरान खान के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव। फाइल फोटो।

क्‍या पाकिस्‍तान में गृह युद्ध की स्थिति उत्‍पन्‍न हो सकती है। ऐसे में सवाल है कि क्‍या सच में इमरान सरकार मुश्किल में है। क्‍या सच में विपक्ष को नियंत्रित करने के लिए सेना और पुलिस का उपयोग किया जा रहा है। क्‍या पाकिस्‍तान में गृहयुद्ध के हालात हैं।

नई दिल्‍ली/इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ विपक्ष के अविश्‍वास प्रस्‍ताव से पाकिस्‍तान की राजनीति गरमाई हुई है। यह आरोप है कि इमरान सरकार ने विपक्ष का मुंह बंद करने के लिए पुलिस और सेना का उपयोग कर रही है। इससे यह आशंका प्रबल है कि पाकिस्‍तान में गृह युद्ध की स्थिति उत्‍पन्‍न हो सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या सच में इमरान सरकार मुश्किल में है? क्‍या सच में विपक्ष को नियंत्रित करने के लिए सेना और पुलिस का उपयोग किया जा रहा है? क्‍या पाकिस्‍तान में गृहयुद्ध के हालात हैं? आइए जानते हैं इन मसलों पर क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ।

1- प्रो हर्ष वी पंत का कहना है कि ज‍िस तरह से विपक्ष की आवाज को नियंत्रित करने के लिए इमरान सरकार ने सेना को आगे किया है, वह पाकिस्‍तानी लोकतंत्र के लिए कतई शुभ नहीं है। पाकिस्‍तान में लोकतंत्र कमजोर है, ऐसे में सेना एक निर्वाचित सरकार को हटाने का मौका खोजती है। इमरान खान जिस तरह से व‍िपक्ष के नेताओं को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल और सेना का इस्‍तेमाल कर रही है, वह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

2- प्रो पंत ने कहा कि सरकार और राजनीति में सेना का हस्‍तक्षेप खुद इमरान सरकार के लिए ठीक नहीं है। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान में ऐसे कई मौके आए हैं जब पक्ष और विपक्ष की कलह का सेना ने लाभ उठाया है। ऐसे में इमरान सरकार को सेना को राजनीति से दूर रखना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान के राजनीतिक इतिहास से इमरान खान को सबक लेना चाहिए। इसलिए सेना को राजनीति से दूर रखना चाहिए। 

3- उन्‍होंने कहा कि इमरान सरकार को बचाने के लिए गृहमंत्री शेख रशीद के इशारे पर पुलिस ने संसद के अंदर छापे मारी की। इस अभियान के दौरान पुलिस ने अंसारउल इस्‍लाम के दर्जनों कार्यकर्ताओं और चार सांसदों को गिरफ्तार किया है। वहीं कई सांसदों ने संसद में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ अपनी गिरफ्तारी दी है। बता दें कि पुलिस की इस कार्रवाई के बाद जमीयत के सदस्‍यों ने देशभर में जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। पेशावर में तो उन्‍होंने पाकिस्‍तानी सेना के जवानों को घेर लिया और पीछे भागने के लिए मजबूर कर दिया। इससे यह सवाल उठने लगा है कि पाकिस्‍तान में गृहयुद्ध के आसार हैं।

4- प्रो पंत ने पाकिस्‍तान में अगर जनता सेना के खिलाफ हुई तो स्थिति पर नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल होगा। हालांकि, उन्‍होंने पाकिस्‍तान में किसी गृहयुद्ध की आशंका को खारिज किया है, लेकिन सेना के दखल का असर पाकिस्‍तान की राजनीति के लिए शुभ नहीं होगा। उन्‍होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयोग से सेना सत्‍ता पर काबिज हो सकती है। 

4- उन्‍होंने कहा कि पाकिस्तान के 73 वर्षों के इतिहास में आधे से ज्यादा समय तक देश पर शासन करने वाली सेना सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में काफी हावी रही है। इमरान खान गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं और यदि गठबंधन में शामिल कुछ दल उन्हें हटाने का फैसले करते हैं तो उन्हें पीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है। पाकिस्तान के संसदीय लोकतंत्र में यह असामान्य बात नहीं है।

सेना सरकार के साथ खड़ी

पाकिस्तान में बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने इस विचार को खारिज किया कि देश की सेना किसी का समर्थन कर रही है। चौधरी ने दावा किया कि सशस्त्र बल पाकिस्तान की इमरान खान सरकार के साथ खड़े हैं। चौधरी ने मीडिया से यह बात कही। उनका यह बयान खान को पद से हटाने के लिए नेशनल असेंबली में विपक्षी दलों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के कुछ दिन बाद आया है। चौधरी ने कहा कि हमारी संवैधानिक व्यवस्था में, सेना सरकार के साथ खड़ी रहती है। सेना को संविधान का पालन करना होता है, और यह संविधान का पालन करती रहेगी।