डिजिटल यूनिवर्सिटी को लेकर अब छात्रों को नहीं करना होगा लंबा इंतजार, जानिए कब तक शुरू होने की है उम्मीद

 

सीटों की संख्या पर नहीं रहेगी कोई पाबंदी-रेगुलर कोर्सों की तरह नियमित रूप से आनलाइन कक्षाएं भी लगेंगी।

इन कोर्सों की पढ़ाई डिजिटल यूनिवर्सिटी के जरिये ही कराई जाएगी। ऐसे में कोर्सों की गुणवत्ता और दाखिले को सुनिश्चित करने का जिम्मा उसके पास होगा। यह पढ़ाई भी रेगुलर मोड में संचालित कोर्सों की तरह ही होगी। इसमें छात्रों को घर बैठे ही आनलाइन क्लास लेना अनिवार्य होगा।

नई दिल्ली, ब्यूरो। बजट में प्रस्तावित डिजिटल यूनिवर्सिटी को लेकर छात्रों को लंबा इंतजार नहीं करना होगा। ज्यादा संभव है कि यूनिवर्सिटी इसी साल अगस्त से काम करने लगे। इनमें डिग्री, डिप्लोमा व सर्टिफिकेट सहित सभी कोर्सो की पढ़ाई होगी। सीटों पर भी किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं रहेगी। शिक्षा मंत्रालय डिजिटल यूनिवर्सिटी को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) सहित शिक्षा से जुड़े दूसरी सभी एजेंसियों और विशेषज्ञों के साथ अब तक करीब आधा दर्जन बैठकें कर चुका है।

इसमें दुनिया में संचालित डिजिटल यूनिवर्सिटी की जानकारी भी साझा की गई। फिलहाल जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक यूनिवर्सिटी खुद का कोई भी कोर्स नहीं शुरू करेगी, बल्कि देश भर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के कोर्सो को ही उपलब्ध कराएगी। इनमें केंद्रीय विश्वविद्यालय और इनसे संबद्ध कालेज भी शामिल होंगे। हालांकि इन कोर्सों की पढ़ाई डिजिटल यूनिवर्सिटी के जरिये ही कराई जाएगी। ऐसे में कोर्सों की गुणवत्ता और दाखिले को सुनिश्चित करने का जिम्मा उसके पास होगा। यह पढ़ाई भी रेगुलर मोड में संचालित कोर्सों की तरह ही होगी। इसमें छात्रों को घर बैठे ही आनलाइन क्लास लेना अनिवार्य होगा।

यूनिवर्सिटी सभी छात्रों को इसके लिंक उपलब्ध कराएगी। इस बीच देश के सभी गांवों को तेजी से ब्राडबैंड से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों के मुताबिक जब तक सभी गांव ब्राडबैंड और इंटरनेट सेवा से नहीं जुड़ जाते तब तक डिजिटल यूनिवर्सिटी को बड़े स्तर पर शुरू करने में दिक्कत होगी। अगले साल तक इस काम को पूरा करने की योजना है। मौजूदा समय में देश में करीब साढे़ छह लाख गांव हैं। इनमें अब तक करीब ढाई लाख गांव ब्राडबैंड से जुड़ गए हैं। बाकी गांवों तक भी ब्राडबैंड की लाइन डालने का काम तेजी से चल रहा है।

मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों की मानें तो अप्रैल तक इसका पूरा स्वरूप तय कर लिया जाएगा। इस विवि के शुरू होने से छात्रों की अच्छे संस्थानों में पढ़ने की चाहत पूरी होगी। अब तक इन संस्थानों में सीटों की संख्या में सीमित रहने से उन्हें दाखिला नहीं मिल पाता था। साथ ही उच्च शिक्षा के सकल नामांकन दर (जीईआर) को बढ़ाने की सरकार की पहल को भी सफलता मिलेगी। पहुंच से दूर होने के चलते अभी तक बड़ी संख्या में छात्र बारहवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते थे। लेकिन इस यूनिवर्सिटी के जरिये अब कोई भी छात्र घर बैठे ही दाखिला लेकर पढ़ाई जारी रख सकेगा। मौजूदा समय में देश में 18 से 23 वर्ष की आयुवर्ग के करीब 27 फीसद छात्र ही उच्च शिक्षा में दाखिला लेते हैं।