तीनों नगर निगमों को एक करने की कवायद शुरू, अब तत्परता की दरकार

आयोग ने कहा है कि वह केंद्र सरकार के पत्र के मद्देनजर कानूनी सलाह ले रहा है।

आयोग ने कहा है कि वह केंद्र सरकार के पत्र के मद्देनजर कानूनी सलाह ले रहा है जिसके बाद चुनाव को लेकर एक सप्ताह में स्थिति स्पष्ट की जाएगी। इस बीच प्रश्न यह भी है कि दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में बांटने की आवश्यकता क्यों पड़ी थी।

नई दिल्ली। दिल्ली के तीनों नगर निगमों को एक करने की कवायद शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने उपराज्यपाल के माध्यम से राज्य चुनाव आयुक्त को पत्र भेज इस बारे में जानकारी दी, जिसके बाद आयोग ने चुनाव की तिथियों की घोषणा टाल दी है। आयोग ने कहा है कि वह केंद्र सरकार के पत्र के मद्देनजर कानूनी सलाह ले रहा है, जिसके बाद चुनाव को लेकर एक सप्ताह में स्थिति स्पष्ट की जाएगी। इस बीच, प्रश्न यह भी है कि दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में बांटने की आवश्यकता क्यों पड़ी थी और अब तीनों हिस्सों को एक करने की क्या जरूरत है।

तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दिल्लीवासियों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने की बात कहते हुए वर्ष 2011 में नगर निगम को तीन हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जबकि अब भाजपा का मानना है कि निगम को तीन हिस्सों में बांटने से प्रशासनिक सुविधा तो हुई नहीं, बल्कि आर्थिक समस्याएं बढ़ गई हैं। इसके मद्देनजर वह तीनों निगमों को एक करने के पक्ष में है।

सामान्यतया ऐसा माना जाता है कि विकेंद्रीकरण आम जनता के हित में होता है। उससे लोगों की सुविधाएं बढ़ती हैं और उन्हें संबंधित विभाग से जुड़े कामकाज में आसानी होती है। हालांकि, यदि वर्तमान में तीनों नगर निगमों में काबिज भाजपा यह मानती है कि निगमों को तीन हिस्सों में करने का कोई लाभ नहीं हुआ है, बल्कि आर्थिक नुकसान हुआ है तो उसे एक करने की दिशा में आगे बढ़ना अनुचित भी नहीं है।

दिल्ली के एकसमान विकास के लिए भी आवश्यक है कि एक ही एजेंसी समग्र रूप से पूरी दिल्ली के लिए नीतियां बनाए और उन्हें एकसमान इच्छाशक्ति से लागू कराए। इससे दिल्ली के किसी एक हिस्से के विकास की दौड़ में पिछड़ जाने की आशंका भी नहीं रहेगी।

यही नहीं, निगमों के एकीकरण से खर्चों में कमी आएगी, जिससे आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी और कर्मचारियों को वेतन देने में समय-समय पर आने वाली परेशानी से बचा जा सकेगा। ऐसे में यदि यह तय कर लिया गया है कि निगमों को एकीकृत करना है तो यह काम तेजी से किया जाना चाहिए, ताकि चुनाव भी अधिक समय तक न टालने पड़ें और विकास की राह में कोई बाधा भी न पैदा होने पाए।