दिल्ली के तीनों नगर निगम को एकीकृत करने की प्रक्रिया तेज, पदों की तैयार की जा रही सूची

 

वर्ष 2012 में निगमों के विभाजन के बाद सृजित किए गए पदों की सूची तैयार कर रहे हैं।

निगम में विभागाध्यक्ष से लेकर विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों को विभाग व जोन में रिक्त पदों के आधार के साथ वरिष्ठता की सूची के आधार पर नियुक्त किया जाएगा। ऐसे में कोई देरी न हो और निगम के कामकाज सुचारु रूप से चल सकें।

नई दिल्ली, संवाददाता। दिल्ली के तीनों नगर निगम (उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी) को एकीकृत करने की प्रक्रिया अभी शुरू ही हुई है। फिर भी एकीकृत निगम में कामकाज जल्द से जल्द सुचारु करने की तैयारी तेज हो गई है। उत्तरी दिल्ली निगम के सभी विभागों में श्रेणी अनुसार अधिकारियों व कर्मचारियों की वरिष्ठता की और स्वीकृत एवं रिक्त पदों की सूची बनाई जा रही है। इसे केंद्रीय संस्थापना विभाग (सीईडी) को भेजा जाएगा। हालांकि इस संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं आए हैं और वरिष्ठ अधिकारियों के मौखिक आदेश के आधार पर यह सूची तैयार की जा रही है।

दरअसल संभावना जताई जा रही है कि इस सप्ताह तीनों निगमों को एक करने वाला विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो जाएगा। साथ ही अगले सप्ताह तक यह कानून की शक्ल भी ले लेगा। ऐसे में उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी निगम के बजाय दिल्ली नगर निगम अस्तित्व में आ जाएगा। ऐसे में एक निगम में विभागाध्यक्ष से लेकर विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों को विभाग व जोन में रिक्त पदों के आधार के साथ वरिष्ठता की सूची के आधार पर नियुक्त किया जाएगा। ऐसे में कोई देरी न हो और निगम के कामकाज सुचारु रूप से चल सकें, इसलिए यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वहीं, इस संबंध में फिलहाल दक्षिणी और पूर्वी निगम में कोई कार्यवाही शुरू नहीं हुई हैं।

उत्तरी निगम के एक विभागाध्यक्ष ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उच्च अधिकारियों के मौखिक आदेश के बाद हम अपने विभाग में ए, बी, सी व डी श्रेणी के अधिकारियों और कर्मचारियों के स्वीकृत पद, रिक्त पद और वर्ष 2012 में निगमों के विभाजन के बाद सृजित किए गए पदों की सूची तैयार कर रहे हैं।

पसंद के अनुसार मिली थी तैनाती: उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में जब दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में बांटा गया था, कर्मचारियों को उनके रिहायश और पसंद के हिसाब से निगमों में नियुक्त किया गया था। वहीं, तीन निगम होने के बाद निदेशक स्थानीय निकाय के मार्गदर्शन में कर्मचारियों को कमी की पूर्ति करने के लिए नए पदों का सृजन भी किया गया था। उसके बाद बड़ी संख्या में कर्मी और अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए, जबकि इसकी तुलना में नई भर्तियां कम हुईं।