खेत में पराली के फाने वाले किसानों को मिलेगी सहयोग राशि, प्रदूषण रोकथाम में होगी मदद

 

सरकार ने किसानों के लिए दो सालों में जारी किए चार करोड़ सात लाख रुपये।

कुरुक्षेत्र में एक लाख 12 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाई जाती है। मोटी किस्म की धान की रोपाई होती है। किसान इस धान की कटाई कंबाइन से करवाते हैं। धान की कटाई कंबाइन से कटवाने के बाद फाने खेत में ही खड़े रहते हैं।

कुरुक्षेत्र। धान कटाई के बाद खेतों में खड़े फसली अवशेष (फानों) को आग से बचाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से प्रति एकड़ एक हजार रुपये सहयोग राशि जारी की जा रही है। इसके लिए किसान को इन फानों की गांठ बनवाकर खेतों से बाहर निकालने होते हैं। अब सरकार ने इन फानों में खेत में दबाने पर भी किसान को एक हजार रुपये सहयोग राशि जारी करने का फैसला लिया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के इस फैसले पर किसानों ने खुशी जताई है। किसानों की ओर से पिछले दो साल से ही यह मांग की जा रही थी। 

किसानों को गांठ बनवाकर बाहर निकालने पर ही मिलती थी प्रति एकड़ एक हजार रुपये की सहयोग राशि

जिला भर में एक लाख 12 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाई जाती है। इसमें से करीब 70 प्रतिशत क्षेत्र में मोटी किस्म की धान की रोपाई होती है। किसान इस धान की कटाई कंबाइन से करवाते हैं। धान की कटाई कंबाइन से कटवाने के बाद फाने खेत में ही खड़े रहते हैं। इन फानों को कई उपयोग न होने पर किसान कई बार इन फानों में आग लगा देता है। धान कटाई सीजन में फानों में आग लगाने की घटनाएं बढ़ने पर पर्यावरण में प्रदूषण स्तर बढ़ जाता है। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए प्रदेश सरकार की ओर से लगातार किसानों को फानों में आग न लगाने के लिए जागरूक किया जाता है। किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें सब्सिडी पर आधुनिक उपकरण करवाए जा रहे हैं। इसके लिए जिला भर के करीब 600 कस्टमर हायरिंग सेंटर तैयार किए गए हैं। इन सेंटरों से किसान अपनी जरूरत अनुसार आधुनिक कृषि उपकरण मंगवाकर फानों की गांठ बनवा कर इन्हें खेत से बाहर निकाल सकते हैं या इन्हें खेत की मिट्टी में ही मिला सकते हैं।

दो साल में किसानों को जारी किए चार करोड़ सात लाख रुपये

फसल अवशेष प्रबंधन के तहत पिछले दो सालों से जिला भर के 8705 किसानों चार करोड़ सात लाख 63 हजार 703 रुपये वितरित किए गए हैं। अभी तक यह राशि फानों की गांठ बनवाकर खेत से बाहर निकालने पर ही दी जाती थी। 

किसानों ने की सराहना

गांव कमोदा के प्रगतिशील किसान महावीर सिंह ने इस फैसले पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि फानों को खेत में दबाने से मिट्टी को फायदा मिलता है। इससे पर्यावरण में प्रदूषण नहीं फैलता और खेत की उपजाऊ शक्ति बढने पर किसान को अगली फसल में खाद भी कम डालनी पड़ती है। ऐसे किसानों को भी सहयोग राशि जारी करने पर किसानों को लाभ मिलेगा।

इस खरीफ सीजन से खेत में फाने दबाने पर भी मिलेगी सहयोग राशि

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सहायक कृषि अभियंता राजेश वर्मा ने बताया कि इस खरीफ सीजन से फानों को खेत में दबाने वाले किसानों को भी सहयोग राशि दी जाएगी। इसके बाद कोई भी किसान फानों में आग नहीं लगाएगा।