सड़क दुर्घटना में मामले में मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- पीड़ित के शारीरिक या मानसिक नुकसान की भरपाई धन से संभव नहीं

 

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के मामले में मुआवजे की राशि बढ़ाई (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 49.93 लाख रुपए कर दिया। इसमें दावा प्रार्थनापत्र पेश करने से लेकर धन प्राप्ति तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी शामिल है।

नई दिल्ली, आइएएनएस: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मार्ग दुर्घटना में पीड़ित के शारीरिक या मानसिक नुकसान की भरपाई धन से नहीं की जा सकती है, लेकिन क्षतिपूर्ति के लिए और कोई विकल्प भी नहीं है। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यम की पीठ ने पांच वर्ष के एक बच्चे को मार्ग दुर्घटना के मुआवजे से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने बच्चे को दिए जाने वाले मुआवजे को बढ़ाकर 49.93 लाख रुपये कर दिया। इसमें दावा प्रार्थनापत्र पेश करने से लेकर धन प्राप्ति तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी शामिल है।

चोट के मामले में मुआवजा तय कर पाना मुश्किल

पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत चोट के मामले में नुकसान को तय कर पाना आसान नहीं है। शीर्ष अदालत बच्चे द्वारा कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई कर रही थी जिसमें मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा प्रदान किए गए मुआवजे की राशि 18.24 लाख रुपये से घटाकर 13.46 लाख कर दी गई थी। अदालत ने कहा कि अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार मार्ग दुर्घटना के बाद बच्चा अपने पैरों पर चलने में सक्षम नहीं है, मूत्रनली की समस्या है, कब्ज है और बिस्तर पर पड़े रहने के कारण घाव भी हो गए हैं। हमारा मानना है कि शारीरिक स्थिति को देखते हुए अपीलकर्ता को पूरे जीवन एक सहायक की आवश्यकता पड़ेगा, भले ही वह बाद में किसी उपकरण की मदद से चलने में सक्षम हो भी जाए।

वाहन भत्ते के लिए दो लाख का आदेश

अपीलकर्ता ने न केवल अपना बचपन खोया है बल्कि किशोर जीवन का भी नुकसान झेला है। इस कारण विवाह की संभावना को भी मुआवजे के संदर्भ में देखना होगा। अभिकरण को पैरों में संवेदना खो चुके बच्चे की स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए था। पीठ ने कहा कि अभिकरण ने टैक्सी के खर्च के दावे को नहीं माना था क्योंकि टैक्सी ड्राइवर को अदालत में पेश नहीं किया गया। इतने सारे टैक्सी ड्राइवर को पेश करना असंभव है। यदि बच्चे के माता पिता उसे टैक्सी में लेकर गए तो यही उनके पास एक विकल्प था। हम वाहन भत्ते के रूप में दो लाख रुपये देने का आदेश देते हैं।