मप्र के सागर में छात्रा ने क्लास रूम में हिजाब पहनकर पढ़ी नमाज

 

मप्र के सागर में क्लास रूम में छात्रा ने हिजाब पहनकर पढ़ी नमाज। फोटो इंटरनेट मीडिया

Hijab Row मध्य प्रदेश के सागर में क्लास रूम में छात्रा द्वारा हिजाब पहनकर नमाज पढ़े जाने का मामला गरमाने लगा है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस संबंध में कमेटी गठित कर मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

भोपाल, एएनआइ। मध्य प्रदेश में सागर के डा हरि सिंह गौर सागर विश्वविद्यालय में एक छात्रा क्लास रूम में हिजाब पहनकर नमाज पढ़ती नजर आई है। वीडियो वायरल होने पर इस मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद अब यह मामला गरमाने लगा है। वीसी नीलिमा गुप्ता ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक समिति को अधिसूचित किया है और सभी छात्रों को निर्देश दिया है। चूंकि यह एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, इसलिए सभी धार्मिक कार्य निजी परिसरों व धार्मिक स्थानों पर किए जाने हैं। कर्नाटक का हिजाब विवाद और सागर तक पहुंच गया है। हिंदू संगठनों में इस घटना को लेकर रोष है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को इस संबंध में शिकायत सौंपी है।  रतलब है कि इससे पहले मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित कोठी पैलेस के समीप पुराने कोर्ट परिसर में असामाजिक तत्वों ने भड़काऊ भाषा में लिखा एक पोस्टर चिपकाया गया था। इसमें हिजाब का समर्थन करते हुए हिजाब न पहनने वाली महिलाओं के लिए अभद्र भाषा का उपयोग किया गया है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। हिजाब के समर्थन में भड़काऊ पोस्टर रात में पुराने कोर्ट परिसर स्थित चाय की दुकान के पीछे चिपकाया गया। मार्निंग वाक करने पहुंचे लोगों ने पोस्टर देखा तो पुलिस को सूचना दी।  उज्जैन के एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ला ने कहा कि हिजाब को लेकर भड़काऊ पोस्टर चिपकाने के मामले में केस दर्ज कर लिया है। उकसावे की हरकत करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उज्जैन में तनाव फैलाने या जनता को उकसाने की हरकत पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले दिसंबर, 2020 में अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर निर्माण को लेकर हिंदूवादी संगठनों द्वारा निकाली गई रैली पर बेगमबाग क्षेत्र में मुस्लिम युवकों द्वारा पथराव कर दिया गया था। इसमें कुछ लोग घायल हुए थे और कई वाहनों के कांच टूट गए थे। पुलिस ने 12 नामजद सहित कुल 36 लोगों को आरोपित बनाया था। साथ ही, जिस मकान से पत्थर फेंके गए थे, वह मकान तोड़ दिया गया था। इसी तरह नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में मुस्लिम समुदाय द्वारा महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग पर दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर कई दिनों तक धरना दिया गया था। इससे महाकाल मंदिर जाने वाले भक्तों को खासी परेशानी हुई थी। इस पर कई शहरवासियों ने आपत्ति ली थी और कलेक्टर को ज्ञापन भी दिया था। प्रशासन इस धरने को कई दिन बाद समाप्त करवाया पाया था।