जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने को स्थानीय स्तर तक कार्ययोजना बनाएगा भारत : भूपेंद्र यादव

 

जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने को स्थानीय स्तर तक कार्ययोजना बनाएगा भारत : भूपेंद्र यादव

Climate Change News जलवायु परिवर्तन को लेकर इंटर गवर्नमेंटल पैनल आन क्लाइमेट चेंज (आइपीसीसी) की रिपोर्ट जारी होने के अगले दिन पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार पहले से ही काम कर रही है।

नई दिल्ली/अलवर। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने के लिए भारत जल्द ही स्थानीय स्तर पर एक्शन प्लान तैयार करेगा। सामर्थ्य के साथ स्थिरता (सस्टेनेबिलेटी विद अफोर्डेबिलेटी) का सूक्ति वाक्य देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्लास्गो में काप 26 के दौरान इको फ्रेंडली जीवनशैली की बात कही थी। उन्होंने प्राकृतिक खेती और सोलर के साथ- साथ हाइड्रोजन पर भी फोकस किया। इसे लेकर मंत्रालय ने थिंक टैंक को आमंत्रित किया है। खुली चर्चा के साथ तर्क की कसाैटी पर ही कोई कारगर कार्ययोजना बनाई जाएगी। मानव जीवन केवल सुखी नहीं, निरोग भी होना चाहिए। उन्होंने देश में वन संरक्षण कानून पर भी विचार विमर्श चल रहा है। वन बचाने और वन क्षेत्र बढ़ाने की सोच के साथ यह कानून भी जल्द लाया जाएगा।

 भूपेंद्र यादव ने बताया कि सन् 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा गया है। 2030 तक भी कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में सरकार कई लक्ष्य हासिल कर लेगी। पेट्रोलियम पदार्थों पर सबसे ज्यादा टैक्स भारत में हैं तो इलेक्ट्रिसिटी की लागत भी कहीं ज्यादा है। उन्होेंने कहा कि भारत सरकार जमीनी स्तर पर काम कर रही है। दुनिया में हमारी आबादी 17 प्रतिशत जबकि ग्लोबल वार्मिंग में हमारी हिस्सेदारी केवल चार प्रतिशत है। इसके बावजूद ग्लास्गो में हमने विकासशील देशों की आवाज उठाई। विकसित देशों को अपना दायित्व समझना ही हाेगा। केवल चर्चा या दूसरों की जिम्मेदारी तय करने से कोई हल नहीं निकलेगा।

भूपेंद्र यादव मंगलवार को नीमली/अलवर (राजस्थान) स्थित अनिल अग्रवाल पर्यावरण प्रशिक्षण संस्थान मेें सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की 'स्टेट आफ इंडियाज एन्वायरमेंट रिपोर्ट 2022' जारी करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने 'महामारी और जलवायु परिवर्तन की दोहरी चुनौती' विषय चार दिवसीय कांक्लेव के उदघाटन सत्र को भी संबोधित किया। यादव के साथ मंच पर सीएसई की महा निदेशक सुनीता नारायण भी उपस्थित थीं।

सुनीता नारायण ने कहा कि पिछले दो साल में खासतौर पर कोरोना और जलवायु परिवर्तन दोनों ने भारत सहित दुनिया भर के देशों के लिए समस्याएं खड़ी की हैं। चरम मौसमी घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। उन्होंने इस पर खासी चिंता जताई कि कोई भी घटना भले एक दिन की हो, लेकिन उसके परिणाम सालों तक झेलने पड़ते हैं। उन्होंने इस दिशा में अविलंब पुख्ता कार्ययोजना तैयार और उस पर क्रियान्वयन करने की भी वकालत क

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