अंडमान और निकोबार द्वीप पर चक्रवात असानी का खतरा, मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी

 

आइएमडी ने जारी की चेतावनी। (फाइल फोटो)

मौसम विभाग के अनुसार 19 से 22 मार्च तक चक्रवात खाड़ी से टकरा सकता है। आइएमडी का कहना है कि अंडमान सागर और इससे सटे दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति बहुत खराब होने की संभावना है।

पोर्ट ब्लेयर, एएनआइ। बंगाल की खाड़ी के ऊपर साल के पहले चक्रवात आसनी के आने का अंडमान और निकोबार द्वीप पर भी खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने शनिवार को मछुआरों को भी चेतावनी जारी कर उनसे समुद्र में न जाने की अपील की है। जानकारी के अनुसार 19 से 22 मार्च तक चक्रवात खाड़ी से टकरा सकता है। अंडमान और निकोबार प्रशासन ने शनिवार सुबह ट्वीट किया, "चक्रवात आसनी की अवधि के दौरान मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी जाती है।"

21 मार्च को अंडमान और निकोबार द्वीप पर पहुंचेगा चक्रवात

बता दें कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मौसम पूर्वानुमान में कहा गया था कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर 20 मार्च की सुबह तक कम दबाव का क्षेत्र बन जाएगा और 21 मार्च को एक चक्रवाती तूफान में बदल जाएगा। इसके बाद यह आगे और पीछे बढ़ सकता है। यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और 22 मार्च को बांग्लादेश-उत्तर म्यांमार के तटों पर पहुंचेगा। गौरतलब है कि पूर्वानुमान के मद्देनजर, द्वीप प्रशासन ने आपातकालीन नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिए हैं।

65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

आईएमडी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा था कि शनिवार को कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ 45-55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक हवाएं चल सकती हैं। आईएमडी के अनुसार अंडमान सागर और इससे सटे दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति बहुत खराब होने की संभावना है। बता दें कि इसके मद्देनजर मुख्य सचिव जितेंद्र नारायण ने शुक्रवार को चक्रवात आसनी से निपटने के लिए केंद्र शासित प्रदेश स्तर की तैयारियों की समीक्षा भी की।

गृह सचिव ने तैयारियों की समीक्षा की

बता दें कि केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात के मद्देनजर केंद्रीय मंत्रालयों और एजेंसियों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के प्रशासन की तैयारियों की समीक्षा भी की। केंद्रीय गृह सचिव ने केंद्रीय मंत्रालयों और एजेंसियों को नियमित निगरानी रखने

और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अंडमान और निकोबार प्रशासन के संपर्क में रहने का निर्देश दिया था।