क्या है कार्बन बेस्ड टैक्सेशन सिस्टम? इससे कैसे कम होगा प्रदूषण और हरित प्रौद्योगिकी मिलेगा को बढ़ावा? यहां समझें पूरी बात

 

कार्बन बेस्ड टैक्सेशन सिस्टम से कम होगा प्रदूषण

लेक्सस ने एक बयान में कहा कि अन्य देशों की तरह भारत में भी कार्बन बेस्ड टैक्सेशन सिस्टम होना चाहिए। इसका मतलब है कि गाड़ियों से निकलने वाले धुएं (कार्बन) के हिसाब से टैक्स लगाया जाय। लेकिन ये प्रदूषण को कम करने में कितना कारगर साबित होगा आइए समझें।

नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। टोयोटा की लग्जरी कार इकाई लेक्सस (Lexus) के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार कार्बन-बेस्ड टैक्सेशन सिस्टम ने विकसित देशों में एक मिसाल कायम की है। अधिकारी ने कहा कि इसे भारत में विद्युतीकरण और अन्य प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने पर विचार किया जाना चाहिए, जिनका लक्ष्य लंबे समय में वाहनों के उत्सर्जन को कम करना है। लग्जरी कार निर्माता, जो भारतीय बाजार में सात मॉडल बेचती है, उसने ओईएम को बाजार में नई तकनीकों और उत्पादों पर निवेश करने में मदद करने के लिए एक दीर्घकालिक नीति रोडमैप के महत्व पर भी जोर दिया है।न आधारित टैक्सेशन
लेक्सस इंडिया के अध्यक्ष नवीन सोनी ने एक बातचीत में पीटीआई से कहा कि हमने विकसित देशों में देखा है कि वाहन टैक्सेशन नीतियों को परिभाषित करने के किसी भी अन्य तरीके से कार्बन आधारित टैक्सेशन को प्राथमिकता दी गई है, जो हमें लगता है कि कई उद्देश्यों को हल करता है। उन्होंने कहा कि सरकार देश में उत्सर्जन को कम करने और ईंधन आयात को नियंत्रित करने का इरादा रखती है, जबकि उपभोक्ता बेहतर तकनीक प्राप्त करना चाहता है।

कार्बन के लिए मूल्य निर्धारित

सोनी ने कहा कि इलेक्ट्रिक डोमेन में कई रास्ते हैं, जिससे कार्बन आधारित टैक्सेशन प्रणाली को क्रिस्टलाइज्ड किया जा सकता है। इससे राष्ट्र और उपभोक्ता दोनों का फायदा होगा। कार्बन आधारित टैक्सेशन प्रणाली से कम कार्बन उत्सर्जन को प्रोत्साहित करने के लिए उत्सर्जित प्रति टन कार्बन या कार्बन डाइऑक्साइड पर एक निश्चित मूल्य निर्धारित किया जा सकता है। अगर ये सिस्टम भारत में लागू होता है तो इससे हरित प्रौद्योगिकी को काफी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रदूषण भी कम होगा।

लेक्सस ने भारत में पूरे किए 5 साल

सोनी ने कहा कि जितने अधिक लोग बढ़ते हैं, यह बाजार उतना ही बढ़ता है। लेक्सस ने भारत में पूर्ण परिचालन के पांच साल पूरे कर लिए हैं और अब देश में विकास के अपने अगले चरण की रूपरेखा तैयार करना चाहता है।बेंगलुरू स्थित कंपनी देश में पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कारों सहित नए मॉडलों में बिक्री के बुनियादी ढांचे और ड्राइव को मजबूत करना चाहती है। भारतीय लग्जरी कार बाजार 2018 में लगभग 40,000 यूनिट प्रति वर्ष की ऊंचाई पर था। यह अगले दो वर्षों में COVID के कारण लगभग 20,000 यूनिट तक आधा रह गया। इस साल इसके 32,000-35,000 यूनिट के निशान पर वापस आने की उम्मीद है।