कश्मीर फाइल्स की अभिनेत्री ने केजरीवाल पर साधा न‍िशाना, कहा- हमें आज भी है इंसाफ का इंतजार

 

गोरखपुर में पत्रकारों से बातचीत करतीं द कश्‍मीर फाइल्‍स की अभिनेत्री भाषा स‍िंगला। - जागरण

The Kashmir Files हिंदी फ‍िल्‍म द कश्‍मीर फाइल्‍स की अभिनेत्री व कश्‍मीरी पडिंत भाषा स‍िंगला ने इस फ‍िल्‍म पर अरव‍िंद केजरीवाल के बयान की न‍िंदा की है। उन्‍होंने कहा क‍ि घटना के तीस वर्ष बाद भी हमें इंसाफ का इंतजार है।

गोरखपुर, संवाददाता। 'द कश्मीर फाइल्स' को लेकर विधानसभा में दिए गए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरव‍िंद केजरीवाल के बयान की फिल्म में शारदा पंडित की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री भाषा सुंबली ने कड़ी न‍िंदा की है।

फ‍िल्‍म का सीन देखने के बाद लगा सबकुछ फ‍िर आंखों के सामने हो रहा है

गोरखपुर में पत्रकारों से बातचीत में बयान को लेकर अपनी नाराजगी जताते हुए भाषा ने कहा कि केजरीवाल कश्मीरी पंडितों का दर्द नहीं जानते, इसलिए ऐसा कह रहे हैं। भाषा यहां फिल्म के प्रमोशन के लिए शहर में थीं। उन्होंने मोहद्दीपुर स्थित ओरियन माल के आइनाक्स मल्टीप्लेक्स में दर्शकों के साथ 'द कश्मीर फाइल्स' देखने के बाद फिल्म से जुड़े अपने संस्मरणों को भी साझा क‍िया। भाषा ने बताया कि फिल्म के कई सीन देखने के बाद वह अवसाद में चली गई थीं। कई बार उन्हें ऐसा लग रहा था कि सबकुछ उनकी आंखों के सामने एक बार फिर हो रहा है।

गांव न छोड़ने पर जला द‍िया ज‍िंदा

उन्होंने बताया कि हाल ही उन्हें यह पता चला है कि उनके पिता की चाची को गांव छोड़ कर न जाने पर घर में ही ज‍िंदा जला दिया गया था। यह जानकारी उन्हें तब हुई जब अरव‍िंद केजरीवाल के बयान को लेकर उनके लेखक पिता अग्निशेखर पत्रकारों से अपना दर्द साझा कर रहे थे। भाषा का कहना था कि फिल्म में तो कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार का कुछ हिस्सा ही दिखाया गया है। इससे कहीं ज्यादा अत्याचार उन्हें झेलना पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि कश्मीर से विस्थापित होने वाले परिवारों में उनका परिवार भी शामिल था क्योंकि वह भी कश्मीरी पंडित ही हैं। मां उन्हें दो साल की उम्र में कश्मीर से दिल्ली शरणार्थी शिविर में लेकर आई थीं।

कई करीबियों की गई जान

भाषा ने बताया कि उनके मामा और मौसी इसी हादसे में जान गवां बैठे थे। वह आज भी खुद को शरणार्थी मानती हैं। शारदा पंडित के किरदार को मैं कभी नहीं भूलूंगी क्योंकि यह मेरा दर्द भी है। भाषा ने कहा कि बहुत कम समय में जिस तरह फिल्म ने लोगों के दिलों में जगह बनाई है, उससे स्पष्ट है कि लोग आज भी अच्‍छे कंटेंट पर बनी फिल्मों को पसंद करते हैं। इससे अब दूसरे फिल्मकारों को भी स'ची कहानियों को आगे लाने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर फिल्म से जुड़े विवाद को स्पष्ट करने आए कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ सुशील पंडित ने कहा कि फिल्म के जरिए कश्मीरियों का दर्द लोगों को पता तो चला है लेकिन कश्मीर के पंडितों को आज भी इंसाफ का इंतजार है।

फिल्म देख रो पड़े दर्शक

सावरकर विचार मंच की ओर 'द कश्मीर फाइल्स' के विशेष-शो के आयोजन के जरिए फिल्म देखने वाले दर्शकों को कई ²श्यों ने भावुक कर दिया। कई बार वह रो पड़े। हाल में उठने वाली सिसकियां इसकी गवाही थीं। फिल्म देखने के बाद सभी ने एक स्वर से कहा कि लंबे समय तक कश्मीरी पंडितों ने अपने दर्द को छिपाए रखा। यह फिल्म सच दिखाने की साहस भरी कोशिश है। फिल्म देखने वालों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक सुभाष, अश्वनी, अनुपम सहाय, डा. आशीष श्रीवास्तव, डा. प्रदीप राव, मृत्युंजय उपाध्याय, डा. देवेज्य, शैवाल शंकर आदि शामिल रह

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