तिब्बत राष्ट्रीय विद्रोह दिवस पर चीन के खिलाफ प्रदर्शन, लगाए गए चीन विरोधी नारे

 

तिब्बतियों ने की आजादी की मांग, मिलान, ब्रिटेन, ओटावा में चीनी महावाणिज्य दूतावास के बाहर जुटे लोग

इटली के मिलान में चीनी महावाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन में बड़ी संख्या में तिब्बतियों ने भाग लिया। इटली तिब्बत एसोसिएशन के अध्यक्ष क्लाउडियो कार्डेली और इटली में तिब्बती समुदाय के अध्यक्ष जेटेन लोंगोनी ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

नई दिल्ली, एएनआइ। तिब्बत के हजारों लोगों ने 63वें राष्ट्रीय विद्रोह दिवस पर दुनिया के कई देशों में चीन के खिलाफ प्रदर्शन किया। तिब्बत के लोगों पर चीन के अत्याचारों का विरोध किया गया। लोगों ने आजादी की भी मांग की।

इटली के मिलान में चीनी महावाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन में बड़ी संख्या में तिब्बतियों ने भाग लिया। इटली तिब्बत एसोसिएशन के अध्यक्ष क्लाउडियो कार्डेली और इटली में तिब्बती समुदाय के अध्यक्ष जेटेन लोंगोनी ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। इस दौरान चीन विरोधी नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने पिछले छह दशकों से तिब्बत पर चीन के अवैध कब्जे की निंदा। पंचेन लामा सहित तिब्बतियों के जबरन गायब होने का मुद्दा उठाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तिब्बतियों को अगला दलाई लामा को स्वीकार करने का अधिकार है और वे चीनी कठपुतली को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

कनाडा के ओटावा में चीनी दूतावास के सामने भी तिब्बती और अन्य समुदायों के समर्थक एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने तिब्बत पर चीन के अवैध कब्जे की निंदा की और तिब्बतियों के गायब होने का मुद्दा उठाया।

इसके अलावा लंदन में चीनी दूतावास सहित विभिन्न स्थानों पर तिब्बतियों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चीन के तिब्बत पर अवैध कब्जे के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों द्वारा टाउन हाल, ग्रीनविच के वूलविच रायल बरो में ध्वजारोहण समारोह का आयोजन किया। 10 मार्च 1959 को तिब्बतियों ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा अपनी मातृभूमि पर जबरन कब्जा किए जाने के खिलाफ विद्रोह किया था।

1959 में तिब्बती विद्रोह राजधानी ल्हासा में चीनियों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों से शुरू हुआ, जो बाद में हिंसक हो गया जिसमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों द्वारा हजारों तिब्बती मारे गए।