विकास का कोई भी काम शुरू करने से पहले पुख्ता तौर पर दूर की जाएं बाधाएं, नहीं लगेगा जाम, कम होंगी समस्याएं

 

प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि भूमि अधिग्रहण पूरी तरह से हो गया है।

दरअसल जब एक ही ठेकेदार पूरे काम को करता है तो उस पर जवाबदेही तय करना आसान होता है। अन्यथा प्रोजेक्ट का ठेकेदार तो यही कहता रहेगा कि बिजली विभाग ने खंभे नहीं हटाए सीवर का काम समय पर नहीं हुआ..। इसलिए उसके काम में देरी हुई।

नई दिल्लीsurender Aggarwal । सड़क परियोजना हो चाहे कोई अन्य बड़ी परियोजना। सबसे मुश्किल काम होता है भूमि अधिग्रहण का। उन परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण और ज्यादा मुश्किल हो जाता है जिनमें कामर्शियल प्रापर्टी का अधिग्रहण करना होता है। दरअसल, परियोजना की जद में आने वाली दुकानों के बदले विभाग दुकानें तो दे देता है लेकिन लोग उससे संतुष्ट नहीं होते हैं।

लोगों की चलती दुकानें या उनके व्यापारिक संस्थानों के बदले दी गई प्रापर्टी इसलिए स्वीकार्य नहीं होती है क्योंकि जहां उन्हें प्रापर्टी दी जा रही है, वे इस बारे में आश्वस्त नहीं होते हैं कि उस जगह पर उनकी दुकान, उनका कारोबार चलेगा कि नहीं। इसीलिए भूमि अधिग्रहण के लिए लंबी मुकदमेबाजी की वजह से प्रोजेक्ट में देरी होने लगती है। सबसे बड़ी मुश्किल तब आती है जब प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाने के बाद मुकदमेबाजी शुरू होती है। ऐसे में प्रोजेक्ट का काम बीच में अटक जाता है। इससे बचने के लिए संबंधित विभाग को चाहिए कि प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि भूमि अधिग्रहण पूरी तरह से हो गया है और प्रापर्टी में कोई कानूनी पेंच या मुकदमा लंबित नहीं है।

सार्वजनिक उपयोगिता को समझे

प्रोजेक्ट पर भौतिक रूप से काम शुरू करने से पहले संबंधित विभाग को वहां पर सभी सार्वजनिक उपयोगिता (पब्लिक यूटिलिटी) का पता लगा लेना चाहिए। मान लीजिए राजधानी दिल्ली में कहीं कोई सड़क, पुल या अंडरपास बनाया जाना है। ऐसे में विभाग को सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वहां से पानी व सीवर की पाइपलाइन, गैस पाइपलाइन, टेलीफोन लाइन, बिजली के खंभे व भूमिगत केबल, भूमिगत मेट्रो लाइन, नाला समेत और क्या-क्या चीजें गुजर रही हैं। काम शुरू करने से पहले इन बाधाओं को दूर करने की पुख्ता योजना बना लेना चाहिए। इन बाधाओं को दूर करने से पहले ही अगर प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया, सड़क खोदकर छोड़ दी तो बाद में इन्हें मैनेज करना मुश्किल होता जाता है।

एक ठेकेदार के पास काम है तो जवाबदेही आसान

पानी, बिजली, सीवर, टेलीफोन, भूमिगत केबल आदि सार्वजनिक उपयोगिता वाली चीजों को शिफ्ट करने या प्रोजेक्ट के दौरान उन्हें स्थानांतरित करने का काम जब ये सभी विभाग अलग-अलग करते हैं तो उसमें काफी लंबा समय लग जाता है। सभी विभागों में आपसी तालमेल न होने के कारण यह समस्या पैदा होती है। इसलिए इन सभी चीजों को शिफ्ट करने व उन्हें दोबारा बनाने के काम का एस्टीमेट संबंधित विभाग को ही करना चाहिए। एस्टीमेट के अप्रूवल के बाद इनका काम प्रोजेक्ट के ठेकेदार को ही करना चाहिए।

संबंधित विभाग सिर्फ इस बात की निगरानी करे कि काम ठीक से हो रहा है। एनएचएआइ के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट में हमने ऐसा किया है और इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। दरअसल, जब एक ही ठेकेदार पूरे काम को करता है तो उस पर जवाबदेही तय करना आसान होता है। अन्यथा प्रोजेक्ट का ठेकेदार तो यही कहता रहेगा कि बिजली विभाग ने खंभे नहीं हटाए, सीवर का काम समय पर नहीं हुआ..। इसलिए उसके काम में देरी हुई। एक तरह से उसका कहना सही भी होता है क्योंकि दूसरे विभाग की वजह से हुई देरी की जवाबदेही प्रोजेक्ट के ठेकेदार पर नहीं थोपी जा सकती है।

योजना के साथ जरूर याद रखें

- प्रोजेक्ट की जद में आने वाले पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें स्थानांतरित करना ज्यादा व्यावहारिक है। शिफ्ट किए गए ज्यादातर पेड़ बच जाते हैं।

- पक्का डाइवर्जन भी बहुत जरूरी है। यातायात व्यवस्था खराब नहीं होती है।

- ट्रैफिक लाइट, सिग्नल, टे¨पग, यू-टर्न आदि की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए।

- सुरक्षा व्यवस्था का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए।

(जितेंद्र कुमार गोयल, वरिष्ठ प्रधान विज्ञानी, केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान एवं पूर्व मुख्य महाप्रबंधक, एनएचएआइ)