रूस के बड़े हमले की आशंका के बीच खार्कीव में बम-गोलियों की बौछार के बीच पैदल सफर पर निकले छात्र

 

भारतीय दूतावास की एडवाइजरी के बाद रेलवे स्टेशन छोड़ छात्र लंबे सफर पर निकले पैदल

Ukraine Russia War खार्कीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले राजस्थान के छात्र राहुल शर्मा ने बताया कि मंगलवार देर रात से ही कीव के बाद खार्कीव की स्थितियां बदतर होने लगी थीं। छात्रों ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर बहुत लंबी लाइन थी।

नई दिल्ली । खार्कीव के हालात भयावह हैं। शहर में जगह-जगह रूसी और यूक्रेनी सेना में चल रही जंग के बीच दो हजार से अधिक भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। लगातार हो रही बमबारी और गोलीबारी के कारण 15 घंटे तक खार्कीव रेलवे स्टेशन में भूखे-प्यासे और ठंड में ठिठुरते रहे इन छात्रों ने दैनिक जागरण से अपना दर्द बयां किया। छात्रों ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर बहुत लंबी लाइन थी। हर कोई खार्कीव से लवीव जाना चाहता था, लेकिन यूक्रेनी नागरिक और सेना भारतीय छात्रों के साथ मारपीट कर रहे थे। उनको ट्रेनों में चढ़ने तक नहीं दिया जा रहा था। जितनी भी ट्रेनें आ रही थीं, उन सब पर भारतीय छात्रों को छोड़कर हर दूसरे देश के छात्र जा रहे थे।

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घंटों से जान बचाने को भटक रहे दो हजार भारतीय

छात्रों ने बताया कि भारत सरकार ने बुधवार दोपहर (यूक्रेन समयनुसार) एडवाइजरी जारी कर शाम छह बजे तक खार्कीव खाली करने को कहा। एडवाइजरी के तुरंत बाद ही खार्कीव शहर पर रूस ने हमला कर दिया। रेलवे स्टेशन के दो किमी के दायरे में भी कई हमले किए गए, जिसके बाद रेलवे स्टेशन पर अफरातफरी का माहौल हो गया। कई छात्र अपनी जान बचाने के लिए नजदीकी मेट्रो स्टेशन और शापिंग माल के आसपास छिप गए। छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में मदद की मांग करते हुए कहा कि भारत सरकार उन्हें किसी भी तरह इस माहौल से निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाए। छात्रों ने कहा कि दर्द और दहशत के इस माहौल में बर्फबारी भी हो रही है और उन्हें डर है कि वो जीवित स्वदेश लौट पाएंगे या नहीं।

दूसरी एडवाइजरी के बाद पैदल ही निकले छात

 खार्कीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले राजस्थान के छात्र राहुल शर्मा ने बताया कि मंगलवार देर रात से ही कीव के बाद खार्कीव की स्थितियां बदतर होने लगी थीं। उन्होंने व दोस्तों ने देर रात दो बजे बैग पैक करने के बाद तीन-चार घंटे तक आराम किया और सुबह छह बजे पैदल ही खार्कीव रेलवे स्टेशन के लिए निकल गए। उन्होंने बताया कि उनके हास्टल से रेलवे स्टेशन लगभग 10 किमी दूर है। सभी गोलीबारी और बमबारी से बचते-बचाते दो घंटे बाद स्टेशन पहुंचे तो वहां सैकड़ों की संख्या में लोग पहले से थे। इनमें भारतीय छात्रों के साथ-साथ यूक्रेन, चीन, पाकिस्तान व अन्य देशों के नागरिक भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन में सुबह से जितनी भी ट्रेनें आ रही थीं, उनमें से एक में भी भारतीय छात्रों को चढ़ने नहीं दिया जा रहा था।

ट्रेनों में चढ़ने की कोशिश भी रही विफल

यूक्रेनी महिलाओं और बच्चों को तरजीह दी जा रही थी। कई अन्य देशों के छात्रों को भी ट्रेन में चढ़ने की अनुमति मिली। भारतीय छात्रों ने जब इसपर आपत्ति जताई तो उनके साथ बदसुलूकी की गई। उनके मुताबिक रेलवे स्टेशन में इंतजार करने के दौरान एकाएक आसपास गोलीबारी होने लगी, जिसके बाद छात्रों ने अपनी जान बचाने के लिए वहां रुकना उचित नहीं समझा और वो नजदीक के रेलवे स्टेशन में जाकर छिप गए। इस बीच, भारत सरकार ने दूसरी एडवाइजरी जारी कर उनको रेलवे स्टेशन से 10-16 किलोमीटर दूर स्थित तीन में से किसी एक ठिकाने पर जाने की हिदायत दी। इसके बाद वो लगभग 400 भारतीय छात्रों के साथ रेलवे स्टेशन से लगभग 11 किलोमीटर दूर पिसोचिन के लिए पैदल ही निकल गए।

तापामान माइनस में मगर हौसला बरकार 

हरियाणा के जींद में रहने वाले हर्षित वत्स ने बताया कि वो सुबह छह बजे से माइनस तीन डिग्री तापमान में रेलवे स्टेशन में खड़े थे। छह घंटों तक लाइन में लगने के बावजूद उन्हें ट्रेन में चढ़ने नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि ठंड से बचने के लिए सभी छात्रों ने एक के ऊपर एक तीन से चार कपड़े और हाथों में दस्ताने पहने हुए थे, लेकिन बर्फबारी की वजह से गिरते तापमान ने हाथ जमा दिए। आंखों से बार-बार आंसू भी आ रहे थे। हर्षित ने बताया कि अब अपनी जिंदगी के लिए सभी मीलों दूर भूखे-प्यासे ठंड में पैदल चलने के लिए मजबूर हैं।

सूमी में फंसे 700 से अधिक छात्र

यूक्रेन के पूर्वी इलाके में स्थित सूमी शहर में 700 से अधिक भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। ये सभी सूमी स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र हैं। यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली हरियाणा के पानीपत की छात्रा कुहू ने बताया कि पूरे शहर में रूसी और यूक्रेनी सेना के जवान मौजूद हैं। वो अपने दोस्तों के साथ हास्टल के भूमिगत कमरों में कैद हैं। शहर में कर्फ्यू है। कोई छात्र बाहर नहीं जा सकता। यूक्रेनी नागरिक भी अब हथियार लेकर शहर भर में घूम रहे हैं। धीरे-धीरे राशन भी खत्म होता जा रहा है। छात्र इस शहर से निकलकर जाना भी चाहें तो नहीं जा सकते। सभी परिवहन सेवाएं बाधित हैं। पूरे शहर में टैंक ही टैंक खड़े हैं। बुधवार सुबह ही सूमी में बमबारी हुई है।

दहशत में छात्र

दहशत के साये में आठ दिन से भूमिगत कमरों में रात-दिन काट रहे इन छात्रों की उम्मीदें टूटने लगी हैं। कुहू के मुताबिक, सभी छात्रों के माता-पिता दिन में 20 से 25 बार काल कर हाल जानते हैं। कई बार तो जूनियर छात्र बातचीत करते हुए फफक-फफक कर रोने भी लगते हैं। ऐसे में सीनियर छात्र उनको संभालते हैं। सूमी में फंसे सभी छात्रों ने दैनिक जागरण के माध्यम से भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। छात्रों ने कहा कि रूस बार्डर उनके शहर से 50 किमी दूर है। सरकार किसी भी तरह से उनको यहां से निकालकर भारत वापसी में उनकी मदद करे।