भारत बायोटेक ने कहा, रूस-यूक्रेन युद्ध का सप्लाई चेन पर असर नहीं, कोवैक्सीन में उपयोग किया गया हर घटक पूरी तरह से स्वदेशी

 

भारत बायोटेक ने विकसित की है कोवैक्सीन

भारत बायोटेक ने कहा कि कोवैक्सीन पूरी तरह से स्वदेशी है। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले हर घटक को देश में ही तैयार किया गया है। स्वदेशी तकनीक विकसित करना और उसे बाजार में लाना कंपनी का हमेशा से रणनीतिक निर्णय रहा है।

बेंगलुरु, रायटर। स्वदेशी दवा कंपनी भारत बायोटेक ने शुक्रवार को कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध से अभी तक कंपनी के सप्लाई चेन पर कोई असर नहीं पड़ा है। भारत बायोटेक ने कोरोना रोधी वैक्सीन विकसित की है और कोवैक्सीन नाम से उसका उत्पादन और वितरण कर रही है। भारत में टीकाकरण अभियान में इसका उपयोग भी किया जा रहा है।

भारत बायोटेक ने एक बयान में कहा कि कोवैक्सीन पूरी तरह से स्वदेशी है। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले हर घटक को देश में ही तैयार किया गया है। स्वदेशी तकनीक विकसित करना और उसे बाजार में लाना कंपनी का हमेशा से रणनीतिक निर्णय रहा है, ताकि बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम हो।

रूस और उसके आसपास के देशों में पहले की ही तरह हो रही है उत्पादों की बिक्री

डा. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टोरेंट फार्मा और जायडस लाइफसाइंसेज समेत कुछ अन्य देशी दवा कंपनियों ने भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध का अभी तक उनके कारोबार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। रूस और उसके आसपास के देशों में उनके उत्पादों की बिक्री पहले की तरह ही हो रही है। पिछले साल अप्रैल से दिसंबर के बीच इन कंपनियों ने रूस में 38.6 करोड़ डालर (लगभग तीन हजार करोड़ रुपये) का कारोबार किया, जो उस देश को कुल निर्यात का 15 प्रतिशत है।

बायोटेक द्वारा निर्मित भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन है कोवैक्सीन

बता दें कि कोवैक्सिन भारत बायोटेक द्वारा निर्मित भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन है और इसे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलाजी (NIV) के सहयोग से विकसित किया गया है। इस वैक्सीन को होल-विरियन इनएक्टिवेटेड वेरो सेल-व्युत्पन्न प्लेटफार्म तकनीक का उपयोग करके विकसित किया गया है।

गौरतलब है कि इस बीच देश में कोरोना का टीकारण 179 करोड़ के पार पहुंच गया है। इनमें 96.84 करोड़ पहली, 80.97 करोड़ दूसरी और 1.98 करोड़ सतर्कता डोज शामिल हैं।