आइजीआइ एयरपाेर्ट पर महिला यात्री के बैगेज से निकले कई कारतूस, आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज

 

आरोपित महिला के पास ओवरसीज सिटीजन आफ इंडिया कार्ड है।

पवनप्रीत कौर को 21 मार्च को लुफ्तांसा एयरलाइंस के विमान से म्यूनिख की यात्रा करनी थी। टर्मिनल 3 पर उनके बैगेेज की जांच जब हुई तब उसमें कुछ संदिग्ध सामान नजर आया। सुरक्षा जांच के लिए लेवल 4 पर बैगैज भेजा गया। बैगेज से छह कारतूस बरामद हुए।

नई दिल्ली A.k.Aggarwal। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (आइजीआइ) पर कारतूस के बरामदगी का सिलसिला जारी है। ताजा मामले में एक महिला यात्री के बैगेज की तलाशी में एक दो नहीं बल्कि छह कारतूस बरामद हुए हैं। आइजीआइ थाना पुलिस ने आरोपित महिला के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामले की तहकीकात शुरू कर दी है। आरोपित महिला के पास ओवरसीज सिटीजन आफ इंडिया कार्ड है।

एयरपोर्ट सूत्र के अनुसार पवनप्रीत कौर को 21 मार्च को लुफ्तांसा एयरलाइंस के विमान से म्यूनिख की यात्रा करनी थी। टर्मिनल 3 पर उनके बैगेेज की जांच जब हुई तब उसमें कुछ संदिग्ध सामान नजर आया। इसके बाद सुरक्षा जांच के लिए लेवल 4 पर बैगैज भेजा गया। यहां तलाशी के दौरान बैगेज से छह कारतूस बरामद हुए। कारतूस के बाबत जब पवनप्रीत से पूछताछ की गई तो वह कुछ भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाई। उनके पास कोई ऐसे कागजात भी नहीं थे, जिसमें इस सामान का कोई जिक्र हो। सूत्रों का कहना है कि पवनप्रीत के पास स्वीडन की नागरिकता है।

गौरतलब है कि पिछले सात दिनों के भीतर एयरपोर्ट पर कारतूस बरामदगी का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 18 मार्च को आइजीआइ एयरपोर्ट पर एक यात्री के सामान की तलाशी में छह कारतूस बरामद हुए। जिस यात्री के सामान से कारतूस बरामद हुए हैं, उसका नाम रोहित है। उसे गोवा जाना था। जब इसके हैंड बैग को एक्सरे जांच से गुजारा गया तब इसमें कारतूस नजर आया। जब सुरक्षा अधिकारियों ने इससे पूछताछ कर कारतूस के बारे में पूछताछ की तो आरोपित कुछ भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे सका।

क्या होता है ओवरसीज सिटीजन आफ इंडिया कार्ड

भारतीय नागरिकता क़ानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी और देश की नागरिकता ले लेता है तो उसे अपनी भारतीय नागरिकता छोड़नी पड़ती है। इन लोगों को भारत की नागरिकता छोड़ने के बाद, भारत आने के लिए वीजा लेना पड़ता था। ऐसे ही लोगों की सुविधा का ख्याल करते हुए 2003 में भारत सरकार ने पर्सन आफ इंडियन ओरिजिन कार्ड जारी किया था। यह कार्ड पासपोर्ट की ही तरह दस साल के लिए जारी किया जाता था।

इसके बाद भारत सरकार ने प्रवासी भारतीय दिवस के मौके पर 2006 में हैदराबाद में ओसीआई कार्ड देने की घोषणा की। काफ़ी समय तक पीआईओ और ओसीआई कार्ड दोनों ही चलन में रहे लेकिन 2015 में पीआईओ का प्रावधान खत्म करके सरकार ने ओसीआई कार्ड का चलन जारी रखने की घोषणा की