दिल्ली के कालकाजी मंदिर परिसर से झुग्गियों को हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से किया इंकार

 

सुप्रीम कोर्ट ने कालाजी मंदिर पास अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से साफ इंकार कर दिया।

दिल्ली के कालकाजी मंदिर परिसर में झुग्गियों के अतिक्रमण की समस्या है। इससे लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है। सुप्रीम कोर्ट ने कालाजी मंदिर के अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से साफ इंकार कर दिया।

नई दिल्ली, संवाददाता। राजधानी दिल्ली के कालकाजी मंदिर से अतिक्रमण हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से साफ इंकार कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दक्षिण दिल्ली के कालकाजी मंदिर में अवैध कब्जा करने वालों और दुकानदारों को अतिक्रमण हटाने के लिए आदेशित किया था। कालकाजी मंदिर के पास दुकानदारों के अतिक्रमण की समस्या है।

इससे रास्ता संकरा हो गया है और लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। इस मामले की हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। हाईकोर्ट के फैसले के संदर्भ में जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और सूर्यकांत की पीठ ने कहा, “हम याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कालाजी मंदिर के अतिक्रमण को लेकर हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से साफ इंकार कर दिया।

दरअसल, प्रशासन ने बृहस्पतिवार को हाई कोर्ट के आदेश पर कालकाजी मंदिर परिसर से 60 झुग्गियों को हटा दिया। आदेश में मंदिर के आसपास अवैध रूप से रह रहे लोगों के अतिक्रमण को हटाने की बात कही गई थी। कोर्ट ने कालकाजी मंदिर के पुनर्विकास के मामले में 15 जनवरी की सुनवाई के दौरान अतिक्रमण हटाने को नवीनीकरण के लिए जरूरी बताया था। गौरतलब है कि कालकाजी मंदिर के आसपास धर्मशालाओं और झुग्गियों में काफी लोग अवैध रूप से बसे हुए हैं। कोर्ट के अनुसार, अप्रैल में शुरू हो रही चैत्र नवरात्रि में मंदिर में ज्यादा संख्या में श्रद्धालु आते हैं और उससे पहले ही आसपास मौजूद धर्मशालाओं और झुग्गियों को खाली होना आवश्यक है।

इसी क्रम में कोर्ट ने 24 मार्च से ही अतिक्रमण हटाने के संदर्भ में आदेश दिया है, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई। झुग्गी में रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें इस कार्रवाई की पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी और अचानक ही झुग्गियों को तोड़ना शुरू कर दिया गया। एक झुग्गीवासी ने बताया कि उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड व अन्य संबंधित कागजात हैं, लेकिन फिर भी उनके निवास के लिए सरकार की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की गई है