झारखंड के छह जिलों में फाइलेरिया का कहर, सोमवार से हर व्यक्ति को मुफ्त खिलाई जाएगी दवा

 

Jharkhand Health News: झारखंड सरकार सोमवार से फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाने जा रही है।

Filariasis wreaks havoc झारखंड में हाइड्रोसील और लिम्फेडेमा के मरीजों को सूची को अपडेट करने की योजना है। सोमवार से फाइलेरिया प्रभावित झारखंड के छह जिलों में मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम की होगी शुरुआत। राज्य कार्यक्रम अधिकारी ने फाइलेरिया की दवा को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।

रांची, संवाददाता। झारखंड के छह जिले गंभीर रूप से फाइलेरिया जैसी बीमारी की चपेट में हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। अब सरकार ने इन छह जिलों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इन जिलों में साहिबगंज, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, गुमला और देवघर शामिल हैं। सोमवार 7 मार्च से 12 मार्च तक इन छह जिलों में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाया जाएगा।

2030 तक झारखंड को फाइलेरिया रोग मुक्त बनाने का लक्ष्यराज्य कार्यक्रम अधिकारी वेक्टर बोर्न डिजीजेज डा एसएन झा ने रविवार को दैनिक जागरण से कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक झारखंड को फाइलेरिया रोग मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसीलिए योजना अनुरूप यह अभियान शुरू किया जा रहा है। कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए इस अभियान के तहत सभी लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई जाएगी। अभियान के तहत शारीरिक दूरी (दो गज की दूरी), मास्क और हाथों की साफ-सफाई का अनुपालन करने की हिदायत दी गई है।

प्रशिक्षित दवा प्रशासक अपने सामने खिलाएंगे दवाएं

इस अभियान के तहत लगभग 11556921 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखाा गया है। उम्र के अनुसार इन्हें फाइलेरियारोधी दवा डीईसी और अल्बेंडाज़ोल की निर्धारित खुराक प्रशिक्षित दवा प्रशासकों द्वारा अपने सामने मुफ्त खिलाई जाएगी। इन दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी लोगों को यह दवाएं खानी हैं। इस संक्रमण से स्वयं को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए प्रशिक्षित दवा प्रशासकों द्वारा मुफ़्त दी जाने वाली फाइलेरियारोधी दवाओं का सेवन उनके सामने ही अवश्य करना है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि दवाएं वितरित नहीं करनी है, बल्कि अपने सामने ही खिलानी हैं।

फाइलेरिया से इन बीमारियों का भी बना रहता खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एनटीडी के राज्य समन्वयक डा अभिषेक पॉल ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, फाइलेरिया दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। किसी भी आयु वर्ग में होने वाले इस संक्रमण द्वारा शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन हो जाती है, जिसके कारण चिरकालिक रोग जैसे, हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फेडेमा (अंगों में सूजन) और दूधिया सफेद पेशाब (काईलूरिया) से ग्रसित लोगों को भीषण दर्द और सामाजिक भेदभाव भी सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है।

विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए बनाई गई है टीम

डा एसएन झा ने यह भी कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य स्तर से ब्लॉक स्तर तक सुनियोजित रणनीति बनाकर कार्य किया जा रहा है। दवा सेवन के दौरान, किसी भी विषम परिस्थिति के लिए रैपिड रेस्पोंस टीम तैनात रहेगी। साथ ही, प्रतिदिन इस कार्यक्रम की गहन समीक्षा की जाएगी, ताकि इस कार्यक्रम के दौरान संपादित होनेवाली सभी गतिविधियां गुणवत्तापूर्ण हों। उन्होंने बताया कि राज्य में हाइड्रोसील और लिम्फेडेमा के मरीजों की सूची अपडेट की जाएगी, ताकि उनके रोग का प्रबंधन सही तरीके से हो सके।