राकेश टिकैत ने बताया खेती किन वजहों से बन गई है घाटे का सौदा, पढ़िए स्वामीनाथन रिपोर्ट पर क्या कहा?

 

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि खेती महंगा सौदा कैसे होता जा रहा है।

डीजल खाद और बीज की बढ़ी कीमतों का इसमें बड़ा योगदान है। वो एमएसपी पर कानून बनाए जाने की मांग काफी समय से कर रहे हैं अब उनकी मांग है कि एमएसपी पर कानून बनें व स्वामीनाथन की रिपोर्ट देश में लागू होनी चाहिए।

नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि किन वजहों से खेती फिर से घाटे का सौदा बनता जा रहा है। डीजल, खाद और बीज की बढ़ी कीमतों का इसमें बड़ा योगदान है। वो एमएसपी पर कानून बनाए जाने की मांग काफी समय से कर रहे हैं, अब उनकी मांग है कि एमएसपी पर कानून बनें व स्वामीनाथन की रिपोर्ट देश में लागू होनी चाहिए।

अपने इंटरनेट मीडिया एकाउंट ट्विटर पर एक ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा है कि डीजल, खाद बीज की बढ़ी कीमतों ने खेती को फिर घाटे का सौदा बनाया है। एक साल में डीजल औसतन 15-20 रु लीटर महंगा हुआ तो उर्वरक व कीटनाशकों की कीमतों में 10-20% की बढ़ोतरी हुई। एमएसपी पर कानून व स्वामीनाथन की रिपोर्ट अब देश मे लागू होनी चाहिये।

इससे पहले भी उन्होंने एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा था कि राजस्थान के अलवर जिले के बानसूर के गाँव नांगल लाखा में 1100 बीघा जमीन पर गेहूं सरसों की खड़ी फसल को नष्ट किया गया। तैयार फसल को नष्ट करना कौन सा न्याय है। राजस्थान सरकार जल्द से जल्द संज्ञान ले और फसलों के मुवावजे की रकम किसानों को अदा करे।

इससे भी पहले उन्होंने केंद्र सरकार पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था कि संसद की समिति ने माना कि कृषि मंत्रालय किसानों की आय दोगुना नहीं कर पाया, कई राज्यों में आय घट गई। जब तक एमएसपी गारंटी कानून नहीं बनेगा, स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू नहीं होगी तब तक किसान लुटता रहेगा। किसान अधिकारों की लड़ाई और तेज करने का वक्त आ गया है।

मालूम हो कि कृषि कानूनों को खत्म किए जाने की मांग को लेकर राकेश टिकैत ने एक साल से अधिक समय तक यूपी गेट पर धरना देकर प्रदर्शन किया था। भारतीय किसान यूनियन किसानों के हित के लिए लगातार केंद्र सरकार से मांग करती रहती है। उन्होंने एक ट्वीट किया कि बीकेयू लगातार मांग कर रही है कि एमएसपी की कानूनी गारंटी हो वरना किसान ऐसे ही लुटता आया है और लुटता रहेगा। एमएसपी पर वादा कर सरकार भी मुकर रही। बात न मानी तो मजबूरन किसान फिर सड़कों पर उतरेगा।