नैहरन पुखर में हजारों मछलियों का जीवन संकट में, विभाग मान रहा आक्सीजन की कमी जिम्मेदार

 



नैहरनपुखर में स्थित तालाब में शनिवार सुबह हजारों जिंदा मछलियां पानी सतह के बराबर आ गईं।

उपमंडल देहरा के नैहरनपुखर में स्थित तालाब में शनिवार सुबह हजारों जिंदा मछलियां पानी सतह के बराबर आ गईं। आम तौर पर सिर्फ आटा आदि डालने पर ही यह इस तरह नजर आती हैं। अन्यथा यह पानी के काफी अंदर होती हैं।

देहरा, संवाद सहयोगी। उपमंडल देहरा के नैहरनपुखर में स्थित तालाब में शनिवार सुबह हजारों जिंदा मछलियां पानी सतह के बराबर आ गईं। आम तौर पर सिर्फ आटा आदि डालने पर ही यह इस तरह नजर आती हैं। अन्यथा यह पानी के काफी अंदर होती हैं। दोपहर तक कई मछलियों ने दम भी तोड़ दिया। मत्स्य पालन विभाग का मनना है कि ऐसा पानी में आक्सीजन की कमी से हो सकता है। गौरतलब है कि यहां रोजाना लोग दूर-दूर से मछलियों को आटा डालने पहुंचते हैं। लोगों ने प्रशासन से जल्द ही इस मामले में कदम उठाने की मांग की है।

नैहरनपुखर में करीब 20 कनाल क्षेत्र में तालाब है। यहां जलस्तर पूरी तरह बारिश के पानी पर ही निर्भर है। शनिवार सुबह लोगों ने हजारों की संख्या में मछलियां पानी की सतह के करीब देखीं। स्थानीय मंदिर के पुजारी अनीष शर्मा का कहना है कि मछलियां मरने से यहां बदबू फैल जाएगी। वहीं, स्थानीय निवासी मनोज कुमार, अमित रनौट, सेठू शर्मा, विकास राणा, राजेश कुमार, मनमीत धीमान, अरविंद धीमान, रंजना आदि ने प्रशासन से इस समस्या के समाधान की अपील की है। दूसरी ओर, पंचायत के उप प्रधान अजय कुमार का कहना है कि हो सकता है मौसम में आ रहे बदलाव की वजह से ऐसा हुआ हो। एक-दो दिन में यहां से मछलियां निकालकर ब्यास नदी में छाेड़ने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही विभाग के अधकारियों से बातचीत कर इसकी वजह जानने की कोशिश करेंगे।

मत्स्य अधिकारी, देहरा डा कविता का कहना है कि संभव है ऐसा पानी में आक्सीजन की कमी की वजह से हुआ है। पक्के तौर पर जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। ऐसी स्थिति होने पर मछलियों को ताजे पानी में छोड़ना पड़ता है। नहीं तो इनका बचना मुश्किल होता है।