मां की सूझबूझ से सकुशल अमृतसर लौटा नवराज, टीवी पर रूसी हमले की खबर देख बुक करवा दी थी टिकट

 

मां की सूझबूझ से नवराज सकुशल यूक्रेन से स्वदेश लौट आया।

अमृतसर की डा. बलविंदर कौर ने कहा 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया। सुबह करीब साढ़े पांच बजे थे। मैंने टीवी आन किया तो यह खबर मिली। मैंने उसी वक्त बेटे को फोन किया। तुरंत उसकी एयर टिकट बुक करवाई।

 संवाददाता, अमृतसर। मां की सूझबूझ से यूक्रेन में फंसा बेटा समय रहते स्वदेश लौटने में सफल रहा। अगर कुछ घंटों की भी देरी हो जाती तो फिर गुरुनगरी का नवराज भी हजारों छात्रों की तरह यूक्रेन में फंस जाता। सरकारी मेडिकल कालेज के गायनी विभाग से सेवानिवृत्त हुए डा. बलविंदर कौर ने यूक्रेन में फंसे अपने बच्चे को सकुशल निकालने के लिए जिस सूझबूझ का परिचय दिया, उसकी बदौलत नवराज आज अपने घर पर है।

उन्होंने बताया कि उनका बेटा नवराज कीव के बोगोमोलेट्स मेडिकल कालेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुका था। हाल ही में उसने पोस्ट ग्रेजुएशन भी की। दुर्भाग्यवश 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया। सुबह करीब साढ़े पांच बजे थे। मैंने टीवी आन किया तो यह खबर मिली। मैंने उसी वक्त बेटे को फोन किया। तब वह सोया था। मैंने उसे बताया कि यूक्रेन में रूसी सेना ने धावा बोल दिया है। उसे इस बात की जानकारी नहीं थी। मैंने उसे फौरन वहां से निकलने को कहा।

डा. बलविंदर के अनुसार उन्होंने 24 फरवरी को ही यूक्रेन से फ्लाइट बुक करवा दी थी। कुछ देर बाद पता चला कि सभी फ्लाइटें रद कर दी गई हैं। उन्होंने नवराज को प्राइवेट टैक्सी हायर करके निकलने को कहा। हालांकि वह लीवीव जाना चाहता था, पर मैंने उसे रोका। नवराज के साथ बेलारूस व पाकिस्तान के दो छात्र भी थे। तीनों टैक्सी के माध्यम से 35 घंटे का सफर तय करके पोलैंड बार्डर पर पहुंचे। 24 फरवरी को पोलैंड में अपने दोस्त के यहां रुके। उन्होंने पोलैंड से इंडिया की फ्लाइट बुक करवा दी थी। 27 फरवरी को नवराज फ्लाइट से दिल्ली पहुंचा। बलविंदर के अनुसार जब तक नवराज यहां नहीं पहुंचा, तब तक हम सब परेशान रहे, पर हमने हौसला नहीं हारा। वह हर समय टीवी पर नजर रखती थी।

उन्होंने कहा कि नवराज एमबीबीएस व पीजी कर चुका था। उसने यूक्रेन में रहते हुए जर्मन की आनलाइन एकेडमी ज्वाइन की थी, जहां वह जर्मन भाषा सीख रहा था। उसका प्लान जर्मन शिफ्ट होने का था। अचानक रूस ने यूक्रेन पर धावा बोल दिया। हमें डर लगता है। आज भी यूक्रेन में बच्चे फंसे हैं। हाड़ कंपाती ठंड तो है उस पर गोलीबारी और बमबारी हो रही है।

मैंने मां की हर बात मानी

नवराज ने कहा कि मैंने मां की हर बात मानी। जैसा उन्होंने कहा वैसा करता चला गया। हालांकि यूक्रेन से जब निकले तो टैक्सी चालक ने हमसे दस हजार की बजाय 45 हजार रुपये किराया लिया। अब हालात सामान्य होने पर जर्मनी जाऊंगा। नवराज पहला मेडिकल छात्र है जो अमृतसर में सकुशल लौटा है।