विभागों की अनुदान मांगों और विनियोग विधेयक को लोकसभा की स्वीकृति, बिना चर्चा के मिली मंजूरी

 

लोकसभा में गुरुवार को अनुदानों मांगों और उनसे संबंधित विनियोग विधेयक गुरुवार को पास हो गया।

अगले वित्त वर्ष के बजट में विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के लिए प्रस्तावित अनुदानों की मांगों और उनसे संबंधित विनियोग विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पास हो गया। विधेयक को पारित कराए जाने के वक्‍त प्रधानमंत्री मोदी भी सदन में मौजूद थे।

नई दिल्ली, पीटीआइ। लोकसभा ने अगले वित्त वर्ष के बजट में विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के लिए प्रस्तावित अनुदानों की मांगों एवं उनसे संबंधित विनियोग विधेयक को बिना किसी चर्चा के गुरुवार को मंजूरी प्रदान कर दी। इस प्रक्रिया के तहत सरकार को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारत की संचित निधि से धनराशि निकालने को अधिकृत किया गया है ताकि वह कार्यक्रमों और योजनाओं को लागू करने के लिए उस धन का उपयोग कर सके। बजट की अनुदान मांगों और विनियोग विधेयक को पारित कराए जाने के समय सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मौजूद थे।

लोकसभा में पेश किया जाएगा वित्त विधेयक

सदन में इससे पहले रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, पोत परिवहन मंत्रालय से संबंधित अनुदान की मांगों पर अलग अलग चर्चा की गई थी। गुरुवार को केंद्रीय बजट से संबंधित करीब 100 मंत्रालयों एवं विभागों से जुड़े अनुदानों की बकाया मांगों को एक साथ बिना चर्चा कराए सदन की मंजूरी के लिये रखा गया। सदन ने इस संबंध में कुछ सदस्यों के कटौती प्रस्तावों को नामंजूर करते हुए इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। बता दें कि इसके बाद संसद में बजटीय प्रक्रिया के तहत वित्त विधेयक को लोकसभा की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। वित्त विधेयक को मंजूरी बजटीय प्रक्रिया का अंतिम चरण है ।

किसानों की आय कम होने पर संसदीय समिति ने जताई चिंता

समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक 2015-16 से 2018-19 के बीच झारखंड, मध्य प्रदेश, नगालैंड और ओडिशा जैसे राज्यों में किसानों की आय में गिरावट आई है। संसद की एक समिति द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में यह बात कही गई है। समिति ने कृषि मंत्रालय को इन राज्यों में किसानों की आय में गिरावट के कारणों का पता लगाने और उसमें सुधार के लिए एक विशेष टीम बनाने को कहा है। खास बात यह है कि यह स्थिति तब है जब राष्ट्रीय सांख्यिकीय संगठन के मुताबिक देश की मासिक कृषि घरेलू आय 8,059 रुपये से बढ़ाकर 10,218 रुपये हो गई है।

अलग सहकारिता मंत्रालय बनाने का किया स्वागत

पीटीआइ के मुताबिक संसद की एक समिति ने एक अलग सहकारिता मंत्रालय बनाने के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही आगाह किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम तैयार करते समय अत्यंत सावधानी बरती जाए, जिससे देश का संघीय ढांचा प्रभावित नहीं हो। कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी समिति ने मंत्रालय से परिचालन से जुड़े मुद्दों को शीघ्रता से हल करने की मांग की। समिति ने मंत्रालय को सुझाव दिया कि अधिक से अधिक कर्मचारियों की तैनाती तब तक जारी रखनी चाहिए जब तक कि उसे कुल स्वीकृत कर्मचारी नहीं मिल जाते हैं।

पिछले सात सालों के दौरान रोजगार में 22 प्रतिशत की वृद्धि

पीटीआइ के मुताबिक केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को संसद में बताया कि श्रम ब्यूरो की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात वर्षो के दौरान रोजगार में 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में भूपेंद्र यादव ने आवधिक बाल श्रम सर्वे (पीएलएफएस) का हवाला देते हुए कहा कि 15 से 40 आयु वर्ग के वे लोग जो नौकरी करना चाहते हैं, उनकी बेरोजगारी में कमी आई है। पीएलएफएस के अनुसार आइटी, स्वास्थ्य, सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार में वृद्धि हुई है और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।