इमरान खान के बाद अब पंजाब के मुख्यमंत्री बुजदर के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव

 

इमरान खान के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री बुजदर के खिलाफ पाक विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव

8 मार्च को पंजाब असेंबली में विपक्षी दलों द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है। अपने इस प्रस्ताव को लेकर विपक्ष को पूरा भरोसा है कि जितने अधिक पीटीआइ के सांसद सामने आएंगे उतना अधिक इस प्रस्ताव को बल मिलेगा।

 इस्लामाबाद, एएनआइ। पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के बाद अब विपक्ष ने पंजाब असेंबली (Punjab Assembly) में पंजाब के मुख्यमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। सोमवार को जियो टीवी (Geo TV) की रिपोर्ट में बताया गया कि मुख्यमंत्री उस्मान बुजदर (Usman Bujdar)  के खिलाफ अविश्वास  प्रस्ताव (No Trust Motion) पेश किया गया है। इमरान खान के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव और पंजाब के मुख्यमंत्री को हटाने को लेकर पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के भीतर बढ़ते दबाव के मद्देनजर यह अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है।

8 मार्च को पेश हुआ अविश्वास प्रस्ताव

बता दें कि 8 मार्च को विपक्षी दलों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया है। अपने इस प्रस्ताव को लेकर विपक्ष को पूरा भरोसा है कि जितने अधिक पीटीआइ के सांसद सामने आएंगे उतना अधिक इस प्रस्ताव को बल मिलेगा। इमरान खान गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्री खान के सहयोगी दल उनसे किनारा कर रहे हैं जबकि उनकी पार्टी के करीब दो दर्जन सांसद उनके खिलाफ हो गए हैं। 69 वर्षीय इमरान खान की पार्टी के 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में 155 सदस्य हैं और सरकार में बने रहने के लिए कम से कम 172 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

पंजाब असेंबली के सचिव ने की पुष्टि 

वरिष्ठ विधानसभा सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब असेंबली  के सचिव मुहम्मद खान भट्टी के समक्ष मुख्यमंत्री बुजदर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। विधानसभा सचिव ने पुष्टि की कि प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है और उन्होंने कहा कि इसे नियमों और विनियमों के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष को प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष चौधरी परवेज इलाही अविश्वास प्रस्ताव और मांग  पर संविधान और कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे। रेडियो पाकिस्तान के अनुसार, प्रस्ताव प्रस्तुत करने के बाद मुख्यमंत्री प्रांतीय विधानसभा को भंग नहीं कर सकते हैं, जबकि स्पीकर 14 दिनों के भीतर सत्र बुलाने के लिए बाध्य हैं।