कौन हैं डाक्‍टर आशीष झा जिनको अमेर‍िकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने दी है बड़ी जिम्‍मेदारी, एक नजर उनके करियर पर

 

भारतीय मूल के डाक्‍टर झा को मिली अमेरिका में बड़ी जिम्‍मेदारी

भारतीय मूल के डाक्‍टर आशीष झा की बदौलत भारत का सीना गर्व से और चौड़ा हो गया है। उन्‍हें राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने बड़ी जिम्‍मेदारी दी है। डाक्‍टर झा अस्‍सी के दशक में ही अपने माता पिता के साथ अमेरिका चले गए थे।

नई दिल्‍ली (आनलाइन डेस्‍क)। अमेरिका के राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने भारतीय मूल के डाक्‍टर आशीष झा को एक बड़ी जिम्‍मेदारी दी है। ये पूरे भारत और भारतीयों के लिए गर्व की बात है। बाइडन ने उन्‍हें कोविड रेस्‍पांस कार्डिनेटर नियुक्‍त किया है। बता दें कि पूरा विश्‍व अब तक भी कोरोना महामारी से पूरी तरह से उबर नहीं पाया है। दुनिया के कई देशों में लगातार लाखों की तादाद में नए मामले सामने आ रहे हैं। अमेरिका अब तक इस महामारी से जूझ रहा है। ऐसे में ये जिम्‍मेदारी काफी बड़ी है।

मूल रूप से बिहार के है डाक्‍टर झा

बता दें कि डाक्‍टर झा भारतीय मूल के अमेरिकी चिकित्सक है। मूल रूप से वो बिहार से संबंध रखते हैं। वहीं उनका जन्‍म भी हुआ था। राष्‍ट्रपति बाइडन ने उन्‍हें रेस्‍पांस कार्डिनेटर नियुक्‍त करते हुए यहां तक कहा कि वो ये अनाउंस करते हुए काफी उत्‍साहित हैं। डाक्टर झा अमेरिका के प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों में से एक हैं।  डाक्‍टर झा अब मैनेजमेंट एडवाइजर और राष्ट्रपति के पूर्व चीफ इकनामिक एडवाइजर जेफ जेंट्स की जगह लेंगे।

डाक्‍टर झा के करियर पर एक नजर 

डाक्‍टर झा को संक्रामक रोगों विशेषज्ञता हासिल है। फरवरी 2020 में उन्‍हें यूनिवर्सिटी स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ का प्रमुख नियुक्‍त किया गया था। डाक्‍टर झा 80 के दशक की शुरुआत में ही बिहार से अपने माता-पिता के साथ पहले कनाडा और फिर अमेरिका चले गए थे। वहां पर उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इकनामिक्‍स में बीए किया और बाद में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से एमडी किया। आपको बता दें कि डाक्‍टर झा हार्वर्ड ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट का नेतृत्व भी कर चुके हैं। इसके अलावा उन्‍होंने हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में पढ़ाया भी है। अब तक उनके नाम से करीब 200 से अधिक जर्नल छप चुके हैं। झा को इबोला पर अपने अभूतपूर्व शोध के लिए भी जाना जाता है।

अगले माह जेफरी की जगह लेंगे झा 

झा मौजूदा समय में ब्राउन विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डीन हैं। वह जेफरी जिएंट्स की जगह लेंगे। भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर का कार्यकाल पांच अप्रैल से शुरू होगा। बता दें कि अमेरिका में कोविड से अबतक 9.7 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। गौरतलब है कि कोरोना महामारी में अमेरिका सबसे अधिक प्रभावित रहा है। जा हापकिंस यूनिवर्सिटी आफ मेडिसिन के आंकड़ बताते हैं कि यहां पर अब तक इस महामारी से साढ़े नौ लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

डाक्‍टर झा की प्रतिक्रिया

अपनी नियुक्ति के बाद डाक्‍टर झा ने ट्विटर पर लिखा कि कोरोना महामारी को दूर करने में काफी काम किया है। अब भी अमेरिक‍ियों के जीवन की रक्षा को सुनिश्चित करने के लिए काफी कुछ किया जाना है। इसलिए व्‍हाइट हाउस से मिली ये जिम्‍मेदारी उनके लिए काफी अहम है। उन्‍होंने ये भी लिखा है यदि अमेरिकियों के जीवन की हम रक्षा कर पाए तो ये बड़ी बात होगी। मैं इस नई भूमिका को लेकर काफी उत्‍साहित हूं। बाइडन ने कहा कि जेफ की कमी उनको खलती रहेगी। उन्‍होंने महामारी से शुरू हुई लड़ाई में जीत के लिए कड़ी मेहनत की है। उनकी सेवाओं को भुलाया नहीं जा सकता है। उन्‍होंने कहा कि वो आने वाले दिनों में भी इसी प्रगति की उम्‍मीद करते हैं।

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