क्‍या सीमा विवाद सुलझाने आए थे चीनी विदेश मंत्री वांग यी, जानें- क्‍या था उनकी यात्रा का मकसद- एक्‍सपर्ट व्‍यू

 

क्‍या सीमा विवाद सुलझाने आए थे चीनी विदेश मंत्री वांग यी। एजेंसी।

आखिर चीन के रुख में अचानक से तब्‍दीली क्‍यों आई। क्‍या चीन सीमा विवाद के समाधान पर राजी हो गया है। क्‍या उसका कश्‍मीर पर दृष्टिकोण बदल गया है। भारत की यात्रा के ठीक पहले उन्‍होंने कश्‍मीर को लेकर पाकिस्‍तान के रुख का समर्थन किया है।

नई दिल्ली, शुक्रवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत यात्रा पर थे। उनकी भारत यात्रा का आखिर क्‍या मकसद था। आखिर रूस यूक्रेन जंग के बीच वांग को भारत की ओर रुख क्‍यों करना पड़ा। इसके पीछे चीन की बड़ी योजना क्‍या है ? चीनी विदेश मंत्री की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत चीन सीमा व‍िवाद चरम पर है। ऐसे में वांग ने भारत की यात्रा कर कूटनीतिक खिलाड़‍ियों को अचरज में डाल दिया। इसके बाद से यह सवाल उठने लगे क‍ि आखिर चीन के रुख में अचानक से तब्‍दीली क्‍यों आई। क्‍या वह सीमा विवाद के समाधान पर राजी हो गया है। क्‍या उसका कश्‍मीर पर दृष्टिकोण बदल गया है। खास बात यह है भारत की यात्रा के ठीक पहले उन्‍होंने कश्‍मीर को लेकर पाकिस्‍तान के रुख का समर्थन किया है। ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि उनकी यात्रा का मूल मकसद क्‍या है।

1- प्रो हर्ष वी पंत ने कहा कि चीन के विदेश मंत्री की यात्रा का बड़ा मकसद ब्रिक्‍स सम्‍मेलन है। चीन की योजना है कि ब्रिक्‍स सम्‍मेलन में भारत जरूर शामिल हो। खासकर तब जब रूस यूक्रेन जंग के बाद अमेरिका और यूरोपीय देश रूस के खिलाफ खड़े हैं। ऐसे में चीन भारत को ब्रिक्‍स में शामिल कराकर अपनी कूटनीतिक जीत दर्ज करना चाहता है। चीन के विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया है। हालांक‍ि, ब्रिक्स की सालाना शिखर बैठक की तिथि अभी तय नहीं है, लेकिन इस साल अक्टूबर-नवंबर तक इसके आयोजन की संभावना है। चीन के साथ ही रूस भी इस बैठक में सभी शीर्ष नेताओं को आमंत्रित करने पर जोर दे रहा है ताकि वो अमेरिका व पश्चिमी देशों को यह दिखा सके कि उनके साथ विश्व के कुछ दिग्गज देश हैं। भारत इस बैठक में शीर्ष स्तर पर भाग लेने के लिए तभी विचार करेगा जब एलएसी से चीनी सैनिकों की पूरी तरह से वापसी हो।

2- प्रो पंत का कहना है कि रूस यूक्रेन जंग के दौरान रूस अलग-थलग पड़ गया है। अमेरिका इस जंग को लोकतांत्रिक और गैर-लोकतांत्रिक देशों में बांट कर देख रहा है। इस जंग में भारत का रुख तटस्‍थता का रहा है। भारत ने सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ मतदान में हिस्‍सा नहीं लिया। भारत पर रूस के विरोध में खड़े होने का दबाव है। ऐसे में रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन के समक्ष ब्रिक्‍स सम्‍मेलन एक बड़ा मौका है, जब वह भारत समेत लोकतांत्रिक देशों के साथ खड़े होंगे। ब्रिक्‍स दुनिया के समक्ष यह संदेश देना चाहते हैं कि वह यूक्रेन संघर्ष के दौरान अलग-थलग नहीं हैं। इस जंग में चीन प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से रूस का सहयोग कर रहा है। इसलिए वांग की इस यात्रा का मकसद भारत को ब्रिक्‍स सम्‍मेलन में शामिल करने की बड़ी कूटनीतिक पहल है।  

क्‍या है ब्रिक्‍स सम्‍मेलन

अंग्रेजी के अक्षर BRICS से बना शब्द 'ब्रिक्स' दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक संगठन है। इसमें ब्राजील , रुस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल है। ब्रिक्स देश आर्थिक मुद्दों पर एक साथ काम करना चाहते हैं, लेकिन इनमें से कुछ के बीच राजनीतिक विषयों पर भारी मतभेद हैं। इन विवादों में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद प्रमुख है। भारत चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों के बारे में भी असहज है। इसके अलावा भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था है और ये देश अमरीका के साथ अपने नजदीकी संबंधों के लिए जाने जाते हैं। उधर, इस समूह में चीन भी है जहां साम्यवादी शासन है।

विदेश मंत्री जयशंकर और वांग की तीन बार मुलाकात

गलवन घाटी में चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बाद भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग की तीन बार दूसरे देशों (रूस और ताजिकिस्तान) में मुलाकात हो चुकी है। दिसंबर, 2019 के बाद से दोनों तरफ से एक-दूसरे देश में की गई यह सबसे बड़ी आधिकारिक यात्रा है। इस बैठक के बाद जयशंकर ने कहा कि मैंने बहुत ईमानदारी से चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर भारत की राष्ट्रीय भावना से उन्हें अवगत कराया। सीमा पर अमन व शांति भारत व चीन के द्विपक्षीय रिश्तों की सबसे आवश्यक बुनियाद है। अगर हम रिश्तों को सुधारने को लेकर प्रतिबद्ध हैं तो हमारी कोशिशों में भी यह गंभीरता से दिखाई देनी चाहिए। अभी सीमा विवाद को सुलझाने को लेकर सैन्य कमांडरों और विदेश मंत्रालयों के बीच वार्ता हो रही है, जिसकी रफ्तार सुस्त है और हमारी बातचीत का एक मकसद यह है कि इसे तेज किया जाए।