विधायकों को मुंबई में घर देने के उद्धव ठाकरे के फैसले पर शरद पवार की आपत्ति, बताई वजह

 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों से आनेवाले विधायकों को मुंबई में घर देना चाहते हैं। लेकिन उनकी सरकार को सहयोग दे रही राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार को उनका यह विचार पसंद नहीं आया। कांग्रेस भी उद्धव के इस विचार का विरोध कर रही है।

 मुंबई, राज्य ब्यूरो। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों से आनेवाले विधायकों को मुंबई में घर देना चाहते हैं। लेकिन उनकी सरकार को सहयोग दे रही राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार को उनका यह विचार पसंद नहीं आया। कांग्रेस भी उद्धव के इस विचार का विरोध कर रही है। मुख्यमंत्री ठाकरे ने हाल ही में विधानसभा में घोषणा की थी कि उनकी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों से आनेवाले विधायकों को मुंबई में स्थायी आवास देना चाहती है। इस योजना से मुंबई, ठाणे एवं नई मुंबई के विधायकों को बाहर रखने की बात कही गई थी। साथ ही, ऐसे विधायकों को भी प्राथमिकता से बाहर रखा गया था जिनके स्वयं या पत्नी के नाम पर मुंबई में घर हो। 

कांग्रेस एवं राकांपा ने जताई आपत्ति

इस प्रकार कुल 300 विधायकों के लिए मुंबई में घर बनाए जाने की योजना है। लेकिन उद्धव की इस योजना पर उनके सहयोगी दल कांग्रेस एवं राकांपा ने आपत्ति जतानी शुरू कर दी है। राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि हालांकि यह निर्णय महाविकास आघाड़ी सरकार का है, लेकिन मेरा निजी विचार है कि सरकार को विधायकों के लिए घर नहीं बनाना चाहिए। सरकार चाहे तो म्हाडा द्वारा बनाए जानेवाले घरों में विधायकों के लिए कोटा तय कर सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों से मुंबई में आनेवाले विधायकों के लिए बनाने की योजना

उद्धव की योजना पर आपत्ति उठानेवाले शरद पवार अकेले नहीं हैं। कांग्रेस के कुछ विधायकों ने भी इस पर आपत्ति जताई है। मुंबई के एक विधायक जीशान सिद्दीकी ने ट्वीट कर कहा है कि हमें महाराष्ट्र सरकार से घर नहीं चाहिए। हमारे चुनाव क्षेत्र बांद्रा के तमाम लोग बुरी स्थिति में रहने को मजबूर हैं। जीशान ने मुख्यमंत्री एवं गृहनिर्माण मंत्री जीतेंद्र आह्वाड से अनुरोध किया है कि वे विधायकों के आवास के लिए खर्च होनेवाली राशि का उपयोग गरीबों के लिए घर बनाने में करें।

कांग्रेस की सोलापुर से विधायक प्रणति शिंदे ने भी इस योजना पर आपत्ति उठाई है। हालांकि जीशान सिद्दीकी की आपत्ति का जवाब देते हुए गृहनिर्माण मंत्री जीतेंद्र आह्वाड ने कहा कि ये घर आपके (मुंबई के विधायकों) के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से मुंबई में आनेवाले विधायकों के लिए बनाने की योजना है। आह्वाड ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये आवास मुफ्त नहीं दिए जा रहे।

माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे ने सभी दलों के विधायकों का दिल जीतने के लिए इस योजना की घोषणा की थी, लेकिन विपक्षी दल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत दादा पाटिल ने कहा है कि वे स्वयं मुंबई के बाहर से आनेवाले विधायक हैं। लेकिन वे इस योजना का समर्थन नहीं करते। इस राशि का उपयोग किसानों एवं राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने पर खर्च करना चाहिए।

बता दें कि अन्य राज्यों की राजधानियों की भांति ही मुंबई में भी विधायक निवास की व्यवस्था रही है। जहां जीतकर आनेवाले विधायकों को उनके पूरे कार्यकाल भर के लिए आवास मुहैया कराया जाता है। ये इमारतें अब पुरानी हो चुकी हैं, और नए विधायक निवास बनाने की योजना है। लेकिन उद्धव की योजना करीब 300 विधायकों को स्थायी आवास देने की है। जिसका विरोध हो रहा है।

वैकल्पिक तौर पर विधायकों को स्थायी आवास देने के लिए शरद पवार ने जो रास्ता सुझाया है, वह अभी भी म्हाडा की नियमावली में शामिल है। म्हाडा द्वारा बनाए जानेवाले घरों में दो फीसद फ्लैट 12 श्रेणियों के लोगों को आवंटित किए जाते हैं। इनकी लाटरी इन्हीं 12 श्रेणियों के लोगों के बीच निकाली जाती है। इसी प्रकार 2007 तक मुंबई सहित महाराष्ट्र के अन्य नगरों में अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट के भूखंडों पर सामान्य भवननिर्माताओं द्वारा बनाए जानेवाले फ्लैटों में भी मुख्यमंत्री कोटे के तहत विधायकों, सांसदों आदि को फ्लैट आवंटन की व्यवस्था थी। यह व्यवस्था अब समाप्त हो चुकी है।