गांधी परिवार के करीबी टीएस सिंह देव ने कपिल सिब्बल को दिया सुझाव, कहा- खुद अपनी पार्टी गठित कर लें

 

सिंहदेव का कपिल सिब्बल को सुझाव अलग पार्टी करें गठित (एएनआई)

सिंह देव ने राय देते हुए कहा कि कपिल सिब्बल को पार्टी से निकाल देना चाहिए। जिसके बाद उन्हें खुद अपनी एक अलग पार्टी गठित करनी चाहिए। पार्टी में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता स्वीकार्य नहीं। सिंह देव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की कमजोरी का कारण सहिष्णुता ही है।

नई दिल्ली, एएनआई: पांच राज्यों में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस में बगावत के स्वर तेज होने लगे हैं। पार्टी के असंतुष्ट नेताओं के समूह जी-23 के नेता भी सक्रीय हो गए हैं। पिछले दिनों वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने मांग की थी कि गांधी परिवार को नेतृत्व की भूमिका से हट जाना चाहिए। इस पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने सिब्बल को सलाह दी है कि वो अपनी अलग पार्टी गठित कर लें।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में सिंह देव ने अपनी राय देते हुए कहा कि कपिल सिब्बल को पार्टी से निकाल देना चाहिए। जिसके बाद उन्हें खुद अपनी एक अलग पार्टी गठित करनी चाहिए। पार्टी में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता स्वीकार्य नहीं है। सिंह देव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की कमजोरी का कारण सहिष्णुता ही है।

पिछले रविवार हुई कांग्रेस कार्यसमिति के बाद मंगलवार को सिब्बल ने कहा था कि 2014 की चुनावी हार के बाद से कांग्रेस कुछ मौकों को छोड़कर लगातार चुनाव हारती आ रही है। उन्होंने कहा कि कार्यसमिति ने पार्टी नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया है, लेकिन सीडब्ल्यूसी के बाहर के लोगों को कुछ और ही कहना है। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में सिब्बल ने यह भी कहा कि मैं सबकी कांग्रेस चाहता हूं, लेकिन कुछ लोग घर की कांग्रेस चाहते हैं।कपिल सिब्बल द्वारा पार्टी नेतृत्व में बदलाव की मांग उठाए जाने के बाद पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई है। कुछ लोगों ने कपिल सिब्बल पर पार्टी विरोधी गतिविधियां करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का प्रस्ताव पारित किया है।

वहीं, बुधवार को गुलाम नबी आजाद के आवास पर हुई असंतुष्ट जी-23 नेताओं की बैठक में प्रस्ताव पारित कर साफ कहा गया कि कांग्रेस को मौजूदा चुनौतियों से बाहर निकालने के लिए सामूहिक नेतृत्व का माडल ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने शीर्ष से लेकर सभी स्तरों तक सामूहिक व समावेशी नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया की जोरदार पैरोकारी की।