आज ही लीजिए ये पांच संकल्प और बनिए धरती के रक्षक, यदि नहीं उठाए कदम तो होगी मुश्किल

 

अपनी धरती को बचाने के लिए आज ही लें संकल्‍प

पांच संकल्‍पों के जरिए हम अपनी धरती ही नहीं बल्कि आने वाली अपनी पीढ़ी को भी बचा सकते हैं। लेकिन यदि ऐसा नहीं किया गया धरती को तो नुकसान होगा ही बल्कि इससे इंसानी सभ्‍यता को भी नुकसान होगा।

नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन से धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है। बढ़ती गर्मी और अनियमित बारिश के चलते मुश्किलें बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए हमने आज कदम नहीं उठाए तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए जीवन कठिन होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए 2007 से अर्थ आवर को मनाने की मुहिम शुरु हुई। आपके प्रिय दैनिक जागरण समूह ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के साथ मिलकर लोगों को जागरुक करने के लिए एक मुहिम शुरु की है। पर्यावरण को बचाने के लिए जरूरी है कि आप भी अपने हिस्से की हिस्सेदारी करें।

यह शुरुआत छोटी हो सकती है। हम अकसर छोटी-छोटी पहल को नजरंदाज कर देते हैं। हमें लगता है कि इन छोटे प्रयासों से कुछ हासिल नहीं होगा पर ये छोटी कोशिशें ही कामयाबी की कहानी लिखती हैं। इसलिए आवश्यक है कि इस मौके पर पांच संकल्प लेकर धरती के रक्षक बनिए। धरती बेहतर होगी उतना ही हमारा आज और आने वाला कल बेहतर होगा। तो देर किस बात की, आज से ही करिए ये पांच संकल्प।

पहला संकल्प

सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग नहीं :

इस बात का संकल्प लीजिए कि मैं सिंगल प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करूंगा।

अगर नहीं किया बंद : अगर लोगों द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल बदस्तूर ऐसे ही जारी रहा तो 2050 तक समुद्र में मछलियों की तुलना में अधिक प्लास्टिक होगी।

दूसरा संकल्प

ई-वेस्ट को रिसाइकिल करूंगा

अगर नहीं किया बंद : भारत मौजूदा समय में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-वेस्ट उत्पादक देश बन गया है।

तीसरा संकल्प

मैं अपने घर के अनुपयोगी सामानों का बेहतर इस्तेमाल करूंगा।

अगर नहीं किया बंद : अनुपयोगी सामानों को आसान और प्रभावशाली तरीके से दोबारा इस्तेमाल कर धरती की सेहत सुधारी जा सकती है।

चौथा संकल्प

मैं अपने पुराने कपड़ों का दोबारा इस्तेमाल करूंगा।

अगर नहीं किया बंद : फैशन इंडस्ट्री दुनिया में पानी का प्रदूषण फैलाने वाली दूसरी सबसे बड़ी इंडस्ट्री है।

पांचवां संकल्प

मैं अपनी बिजली की खपत कम करूंगा।

अगर नहीं किया बंद : जब आप अपने बिजली के इस्तेमाल को कम करते हैं तो पावर प्लांट से होने वाला उत्सर्जन भी कम होता है। जिससे धरती की सेहत सुधरती है।