अहिंसा पदयात्रा समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा- यह तेरापंथ, मेरा पंथ है

 

तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण की अहिंसा पदयात्रा के संपन्नता समारोह को पीएम ने आनलाइन किया संबोधित

आचार्य महाश्रमण सात वर्ष में 18 हजार किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर चुके हैं। ये पदयात्रा उन्होंने तीन देशों भारत नेपाल और भूटान में की है।इसके जरिये आचार्य ने वसुधैव कुटुंबकम् के भारतीय विचार को विस्तार दिया है।देश के 20 राज्यों को एक विचार से एक प्रेरणा से जोड़ा है।

नई दिल्ली,  संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि श्वेतांबर तेरापंथ के सभी आचार्य का उन्हें हमेशा से विशेष स्नेह मिलता रहा है। इसी प्रेम के कारण उन्होंने आचार्यो के बीच ये कहा था कि यह तेरापंथ, मेरा पंथ है। प्रधानमंत्री ने ये बातें तालकटोरा स्टेडियम में आचार्य महाश्रमण की अहिंसा पदयात्रा के समापन समारोह आनलाइन संबोधित करते हुए कहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आचार्य तुलसी, उनके पट्टधर आचार्य महाप्रज्ञ और अब आचार्य महाश्रमण की उन पर विशेष कृपा रही है। उनके इसी प्रेम के कारण उन्हें तेरापंथ के कार्यक्रमों से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त होता रहता है।

आचार्य महाश्रमण सात वर्ष में 18 हजार किलोमीटर की पदयात्रा पूरी कर चुके हैं। ये पदयात्रा उन्होंने तीन देशों भारत, नेपाल और भूटान में की है। इसके जरिये आचार्य ने वसुधैव कुटुंबकम् के भारतीय विचार को विस्तार दिया है और देश के 20 राज्यों को एक विचार से, एक प्रेरणा से जोड़ा है। साथ ही ये संदेश दिया है कि 'जहां अहिंसा है, वहीं एकता है और जहां एकता है, वहीं अखंडता है। जहां अखंडता है, वहीं श्रेष्ठता है।'

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस यात्रा के पूर्ण होने पर वह आचार्य महाश्रमण और सभी अनुयायियों को श्रद्धापूवर्क अनेक-अनेक बधाई देते हैं। आचार्य महाश्रमण के पहुंचते ही जयकारों से गूंजा स्टेडियम रविवार सुबह नौ बजे आचार्य महाश्रमण तालकटोरा स्टेडियम में पहुंचे। उनके पहुंचते ही पूरा स्टेडियम जय-जय ज्योतिचरण, जय-जय महाश्रमण के जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद आचार्य जी के महामंत्रोच्चार से अहिंसा यात्रा समापन समारोह शुरू हुआ।

समारोह में नेपाल के पूर्व उपराष्ट्रपति परमानंद झा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी सहित हजारों लोग समारोह के साक्षी बने। इस दौरान सभी को नैतिकता, सद्भावना और नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों ने अपने-अपने वीडियो संदेश के माध्यम से आचार्य महाश्रमण के विचारों की सराहना की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, अहिंसा का रास्ता दिखाता है जैन धर्मसमापन समारोह में मौजूद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा का रास्ता दिखता है। पूरे विश्व में हिंसा सुनने और देखने को मिलती है। ऐसे में अहिंसा यात्रा महत्वपूर्ण है। आचार्य देश दुनिया को शांति की राह दिखाने का काम किया है।

आचार्य महाश्रमण ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण ने ये यात्रा नौ नवंबर 2014 को दिल्ली के लालकिला से शुरू की थी। यात्रा के समापन समारोह में अनुयायियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्रों में कहा गया है किसी भी जीव के साथ हिंसा नहीं करनी चाहिए। अहिंसा ऐसा तत्व है, जो जीवन में शांति प्रदान करता है।

पदयात्रा ने जीवन के तीन सूत्र नैतिकता, सद्भावना और नशामुक्ति को प्रसारित करने का काम किया है।