मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद अजनारा बिल्डर को जारी हुआ नोटिस, जानें पूरा मामला

 

मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद अजनारा बिल्डर को जारी हुआ नोटिस

सेक्टर-74 स्थित ग्रैंड अजनारा हेरिटेज सोसायटी में बिल्डर द्वारा मनमानी की जा रही थी। जिसकी शिकायत वहां रहने वाले लोगों ने नियोजन विभाग में की। लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई न की। बिल्डर ने नक्शे में छेड़छाड़ कर लोहे की सीढ़ी लगाई थी।

नोएडा,  संवाददाता। प्रदेश में सरकार किसी की भी हो, लेकिन नोएडा प्राधिकरण अधिकारियों की कार्यशैली में कोई भी बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। न ही अधिकारी अपनी कार्यशैली में बदलाव करना चाहते हैं। यही कारण है कि नोएडा में बिल्डर खुलेआम मनमानी कर रहे हैं। जिन्हें प्राधिकरण नियोजन विभाग अधिकारी सह दे रहे है।

सोसायटी निवासियों की शिकायत आने पर भी कार्रवाई करने के बजाय शिकायतों को झूठा साबित करने पर तुले हैं। यह हाल तब है, जब सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट जैसे मामले में नियोजन विभाग के चार अधिकारियों को योगी सरकार बिल्डरों से सांठगांठ कर अनुचित लाभ में निलंबित कर चुकी है। अब विजिलेंस जांच में आरोप पत्र तक तामील कराया जा चुका है।

बावजूद ताजा उदाहरण सोमवार को सेक्टर-74 स्थित ग्रैंड अजनारा हेरिटेज सोसायटी से सामने आया है। जिसमें वर्ष 2020 से निवासी बिल्डर की मनमानी की शिकायत प्राधिकरण के नियोजन विभाग में कर रहे थे, लेकिन अधिकारी शिकायत पर संज्ञान लेने को तैयार तक नहीं हुए, उल्टा शिकायतों को ही पांच जनवरी को झूठा साबित कर आख्या प्रस्तुत कर दी कि यहां पर बिल्डर काम ही नहीं कर रहा है। जब इस मामले पर निवासियों ने साक्ष्यों के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराया तो अधिकारी व बिल्डर सांठगांठ की पोल खुली।

वरिष्ठ आइएएस विजेंद्र कुमार को जिलाधिकारी सुहास एलवाई को इस मामले पर कार्रवाई के लिए लिखना पड़ा। जब यह पत्र नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचा तो आनन-फानन 24 मार्च को बिल्डर को नोटिस जारी कर दिया गया। सोसायटी एओए महासचिव अभिनव सोनी ने बताया कि बिल्डर ने यहां पर दिसंबर 2020 से बिल्डर की शिकायत की जा रही है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

नवंबर दिसंबर 2021 में फिर शिकायत दी थी, प्राधिकरण ने पांच जनवरी 2022 को दो ड्राफ्टमैन जांच को भेज थे, लेकिन सोसायटी के 15वें टावर क्लाक में किसी भी प्रकार का निर्माण ने होने बात लिख दी। इसके बाद 400 निवासियों के हस्ताक्षर के साथ 500 पेज का शिकायत पत्र फोटो के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा गया। इसके बाद अब कार्रवाई शुरू हुई है। हैरानी की बात यह है कि अभी तक इस टावर को अक्यूपेशन सर्टिफिकेट तक नहीं लिया गया है।

व्यवसायिक गतिविधियां पहले से संचालन शुरू करा दिया है। प्राधिकरण नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक वैभव गुप्ता ने कहा कि मामले पर संज्ञान लेकर बिल्डर को 15 दिनों के भीतर जिम और वाणिज्य गतिविधि को बंद कर साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है। हालांकि इस मामले पर जब अजनारा मीडिया प्रभारी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले में शीर्ष अधिकारियों की बैठक चल रही है, जल्द ही आप को मामले से अवगत करा दिया जाएगा।