जब एक विशेष अदालत चल रही थी तो दो अन्य जिला न्यायाधीश अदालत कक्ष में कैसे हो सकते हैं उपस्थित

 

दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश सुजाता कोहली की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान व्यक्त किया आश्चर्य।

सुजाता कोहली ने खोसला के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है । उन्होंने तर्क दिया है कि किसी भी दोषी को अदालत को धमकाने की अनुमति नहीं होना चाहिए ।

नई दिल्ली,  संवाददाता। दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजीव खोसला के खिलाफ पूर्व न्यायाधीश सुजाता कोहली द्वारा दायर एक आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने आश्चर्य जाहिर करते हुए कहा कि जब एक विशेष अदालत चल रही थी तो दो अन्य जिला न्यायाधीश अदालत कक्ष में कैसे उपस्थित हो सकते थे। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंदीरत्ता पीठ ने कहा कि यह हमारे लिए एक आश्चर्य के रूप में आया है। तो आइए देखते हैं और जिला न्यायाधीश मुख्यालय क्या जवाब देता है। पीठ ने इसके साथ ही जिला न्यायाधीश (मुख्यालय) को निर्देश दिया कि खोसला के खिलाफ सजा की कार्यवाही पर रिपोर्ट दाखिल करें।

पीठ ने उक्त निर्देश तब दिए जब सुजाता ने पीठ सूचित किया कि जब मुख्य मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) मामले में कार्यवाही कर रहे थे, तब दो मौजूदा जिला न्यायाधीश मंच पर मौजूद थे। सुजाता कोहली ने खोसला के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। उन्होंने तर्क दिया है कि किसी भी दोषी को अदालत को धमकाने की अनुमति नहीं होना चाहिए। मामले में अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी। इससे पहले अदालत ने मामले से जुड़ा रिकार्ड व सीसीटीवी फुटेज पेश करने का निर्देश दिया था। सुजाता की याचिका पर निचली अदालत ने खोसला को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। सुजाता का आरोप था कि वर्ष 1994 में खोसला ने उनके साथ अदालत परिसर में मारपीट की थी। याचिकाकर्ता व अधिवक्ता सुजाता कोहली जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुई थी।

सुजाता ने आरोप लगाया कि अदालत कक्ष में बने माहौल का असर 30 नवंबर को दिए गए फैसले में दिखा।व्यक्तिगत रूप से मामले में पेश हुई कोहली ने दलील दी कि सिर्फ इसलिए कि ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश ने एक मामले में दोषसिद्धि का फैसला सुनाने की हिम्मत की। कोहली ने कहा कि खोसला ने सोशल मीडिया पर विभिन्न अपीलें और पर्चे प्रकाशित किए थे।

सुजाता कोहली का आरोप है कि 29 जुलाई 1994 को खोसला ने उन्हें एक प्रस्तावित परिवार कोर्ट में आयोजित सेमिनार में आने को कहा था, लेकिन वह व्यस्त थीं। उनका आरोप था कि खोसला ने अगस्त 1994 में उनसे मारपीट की थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी ने बार एसोसिएशन का सदस्य और अदालत का अधिकार होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की माैजूदगी में एक महिला से मारपीट की थी।